धार्मिक कार्यक्रम में दर्जनों देवी-देवताओं के कारिंदों ने की शिरकत
ढाई करोड़ की लागत से तीन साल बाद तैयार हुई काष्ठकुणी शैली में बनी कोठी
संवाद न्यूज एजेंसी
बालीचौकी ( मंडी)। सिराज घाटी की सुबल वैली के अराध्य देवता समुनाग और नगलबाणी की कोठी की प्रतिष्ठा देव रस्मों के साथ संपन्न हो गई। सिराज घाटी के अराध्य देवता के सुमुनाग की कोठी की प्रतिष्ठा में पूजा-अर्चना के लिए रविवार को 20 हजार से भी अधिक लोगों ने भाग लिया।
महिलाओं ने मंदिर में विराजमान अराध्य देवरथ सुमुनागऔर नगलबाणी पर फूल मालाओं की वर्षा की। घाटी के उपतहसील बागाचनोगी की थाना पंचायत के करढाण गांव में बनी इस कोठी का अपना ही सुंदर नजारा है। देवताओं की इस कोठी पर लगभग ढाई करोड़ से भी अधिक की राशि खर्च हुई है। काष्ठकुणी शैली में बनी इस कोठी में दर्जनों देवी-देवताओं के साथ ऋषि मुनियों के चित्रों को भी चित्रित किया है । बता दें कि सुबल वैली के अराध्य देवता सुमुनाग मन्नतों और लोगों की समस्याओं को दूर करने के लिए चर्चित हैं।
देवरथ के पास जो भी श्रद्धालु सच्ची श्रद्धा के साथ पहुंचता है, देवता उसकी मनोकामना अवश्य पूरी करते हैं। कारदार केशव राम ने बताया कि इस कोठी का निर्माण पिछले तीन सालों से चला हुआ है। कोठी के निर्माण के लिए सात बीह सुबल ने श्रमदान किया है तो वहीं क्षेत्र के लोगों के अलावा श्रद्धालुओं ने भी दिल खोलकर दान किया है। इस कोठी में कारगीरों की ओर से लकड़ी में कई प्रकार की कलाकृतियों को चित्रित किया है। कोठी बनाने वाले 30 वर्षीय मिस्त्री दीपक भारद्वाज का कहना है कि इस कोठी के निर्माण के लिए करीब तीन वर्ष का समय लगा है। देवता कमेटी के प्रधान भूपेंद्र पाल ने सभी देव रस्मों के साथ अराध्य देवता सुमुनाग की प्रतिष्ठा में 20 हजार से भी अधिक लोगों ने भाग लिया ।