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नागरिक अस्पताल का दर्जा, पर कम नहीं हुआ मरीजों का दर्द

Sat, 07 May 2016 07:00 PM IST
मंडी
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नागर‌िक अस्पताल का दृश्य - फोटो : अमर उजाला
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गोहर (मंडी)। सात फरवरी 2015 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से अपग्रेड हुए नागरिक चिकित्सालय गोहर में स्वास्थ्य सुविधाओं में कोई सुधार नहीं हो पाया है। स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा तो बढ़ा दिया पर यहां आने वाले मरीजों का दर्ज कम नहीं हुआ है। अस्पताल में एक्सरे मशीन है, लेकिन मरीजों का एक्सरे करने के लिए विशेषज्ञ नहीं है। सिविल अस्पताल का आलम यह है कि एक भी सफाई कर्मी नहीं है। सफाई व्यवस्था रामभरोसे चल रही है। चिकित्सकों के आठ स्वीकृत पदों में से मात्र दो ही डॉक्टर मरीजों की नब्ज देख रहे हैं।
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चैलचौक से लेकर जंजैहली तक करीब 50 पंचायतों के हजारों लोगों के स्वास्थ्य का जिम्मा उठाए सिविल अस्पताल गोहर दर्जा बढ़ने के बाद भी सीएचसी की सुविधाएं देने पर मजबूर हैं। अस्पताल में आठ में से मात्र दो मेडिकल ऑफिसर तैनात किए गए हैं जो रोजाना करीब 200 ओपीडी देखते हैं और इमरजेंसी भी संभाल रहे हैं। इस अस्पताल में डॉक्टरों के छह पद स्वीकृत हैं। मगर सरकार यहां डाक्टर के पद भरने में नाकाम है। नागरिक चिकित्सालय में विशेषज्ञ डाक्टर का कोई पद स्वीकृत नहीं किया गया है। जिससे लोगों में आक्रोश है। प्रयोगशाला में स्थायी कर्मचारी नहीं है। लैब को सहायक चला रहा है। अस्पताल में रेडियोग्राफर का पद भी खाली चल रहा है। क्लर्क के दो पद हैं जो खाली चल रहे हैं। क्लर्क का काम अस्पताल में तैनात फार्मासिस्ट को दिया गया है। सफाई व्यवस्था सुचारु करने के लिए सिविल अस्पताल गोहर में स्वीपर के 4 पद हैं जो खाली चल रहे हैं।

सुविधाओं के नाम पर किया धोखा : प्रतिनिधि
चैलचौक पंचायत प्रधान कुमार चंद का कहना है कि सरकार ने सीएचसी गोहर को अपग्रेड कर सिविल अस्पताल का दर्जा तो दिया मगर सुविधाओं के नाम पर लोगों से धोखा किया गया है। लोग अभी भी मंडी और सुंदरनगर के अस्पतालों में इलाज करवाने जा रहे हैं। अस्पताल अपग्रेड करना था तो सुविधाएं भी अनिवार्य हैं। शिल्हणू पंचायत के उपप्रधान भीम सिंह ठाकुर का कहना है कि सिविल अस्पताल गोहर में एक्सरे न होने से मरीजों को मंडी पहुंचना पड़ रहा है। जिससे लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। चच्योट पंचायत की प्रधान रुकमणी देवी ने कहा कि गोहर सिविल अस्पताल में डाक्टर की कमी मरीजों पर भारी पड़ रही है। सरकार ने स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा बढ़ाया है तो सुविधाएं भी बढ़ानी चाहिए।
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सिविल अस्पताल गोहर में रोजाना 200 के करीब ओपीडी है। जिनको मात्र दो डाक्टर शिफ्ट में देखते हैं। साथ में आपातकालीन सेवा का बोझ भी इन दोनों चिकित्सकों के सिर पर है। स्वीपरों के पद खाली होने से अस्पताल में सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। अस्पताल के अंदर और बाहर गंदगी का आलम हैं।


विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण क्षेत्र के लोगों को 50 से 80 किलोमीटर दूर मंडी और सुंदरनगर पहुंचना पड़ रहा है। अस्पताल में प्रसव का बोझ भी अधिक है। जहां सुविधाएं कम होने से अनेक मामले मंडी रेफर किए जाते हैं।

बॉक्स
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. देशराज शर्मा का कहना है कि सरकार के नए आदेशानुसार 50 बिस्तर के अस्पताल में किसी भी विशेषज्ञ डाक्टर का पद स्वीकृत नहीं किया गया है। गोहर सिविल अस्पताल में 6 से 8 तक मेडिकल ऑफिसर के पद स्वीकृत किए गए हैं। पूरे प्रदेश में डाक्टरों की कमी चल रही है। सिविल अस्पताल गोहर में डाक्टरों के पद भरने का मामला सरकार के ध्यान में लाया गया है।
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