गोहर (मंडी)। कमरूघाटी में सेब बगीचों की सौदेबाजी शुरू हो गई है। व्यापारियों ने अपने अपने आढ़तियों से संपर्क करने के बाद बगीचों का भ्रमण करना शुरू कर दिया है तथा फलों की बोलियां लगाने का क्रम जारी हो गया है। इस बार सेब की कम पैदावार होने के बावजूद व्यापारियों के हौसले बुलंद हैं।
15 जून तक कमरूघाटी में सेब बगीचों की बोलियों का दौर यौवन पर होगा। 15 जून के बाद ओलावृष्टि का भय काफी कम हो जाता है। कमरूघाटी के सरोआ, सजीहणी, खनैबरू, बांदली, कहरेधार, कुटाहची, बाढू, चौकी, पंडार, घीडी, कमांद और आसपास के सेब बगीचों में व्यापारियों ने डेरा डालना शुरू कर दिया है। क्षेत्र के व्यापारियों ठाकर दास, दीनानाथ, चंद्रमणी, दीवान चंद, देवीराम और हेम सिंह ठाकुर ने बताया कि 100 रुपये प्रति किलो के हिसाब से पेड़ पर सेब की बोली लगाई जा रही है।
कम फसल होने के कारण बागवान बगीचों के दाम बढ़ा रहे हैं। जिससे ऊंची बोली पर सेब की खरीद करनी पड़ रही है। दिल्ली स्थित आजादपुर सब्जी मंडी के क्रास एन कंपनी के आढ़ती नरेश ढल्ल ने बताया कि इस बार कम फसल के कारण मंडी में सेब के कारोबार में उछाल रहने की संभावना है। इस बार मंडी जिले में सेब का उत्पादन 50 फीसदी से काफी नीचे आ गया है। मंडी जिला में कमरूघाटी, जंजैहली घाटी और एप्पल वैली करसोग में सेब का उत्पादन किया जाता है। बागवानी विशेषज्ञ डा. एसपी भारद्वाज ने बताया कि हिमाचल में इस बार सेब की कम पैदावार है। मगर कम पैदावार के चलते जहां सेब लगा है, वह अच्छी गुणवत्ता वाला साबित होगा। उन्होंने बताया कि मंडियों में इसके दाम भी अच्छे मिलेंगे।