बैहना (मंडी)। सपनों को मुठ्ठी में करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति की टोनिक जरूरी है। फिर बाधाएं भी इस्तकबाल करने लगती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है बल्ह घाटी की ग्राम पंचायत गोड़ा गागल के सिहन गांव की देवरानी और जेठानी ने। बस एक छोटी सी पहल शुरू की। उन्होंने गांव की महिलाओं को संगठित किया। एक नवज्योति नाम से स्वयं सहायता समूह बनाया। इसके बाद उन्हें प्रशिक्षण दिया गया।
सिहन गांव की जेठानी-देवरानी नवीन लता और मधु ने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई। महिलाओं ने घर में ही बदाणा और बड़ियां बनाने के साथ-साथ बुनाई, सिलाई-कढ़ाई का कार्य शुरू कर दिया। देखते ही देखते उनके बनाए उत्पाद की बाजार में अच्छी खासी मांग हो गई। सरस मेलों के दौरान उनके उत्पाद शिमला, बिलासपुर, हमीरपुर, चंडीगढ़, देहरादून तक अच्छे दामों में बिक रहे हैं। उनके बनाए बदाणा और सेपू बड़ी की मांग शिमला में प्रदेश सचिवालय, कांगड़ा और कुल्लू तक है। इससे अब महिलाएं नियमित आय अर्जित कर रही हैं, जिससे न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि वे आर्थिक रूप से भी मजबूत हुई हैं।
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महिला एवं बाल विकास विभाग, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन तथा स्थानीय पंचायत की ओर से समूह को प्रशिक्षण, बीज पूंजी और विपणन सहायता प्रदान की गई है। इससे समूह की महिलाएं आधुनिक तकनीक और व्यापारिक समझ से भी जुड़ सकीं। प्रत्येक महिला 10 से 12 हजार रुपये की मासिक आय प्राप्त कर रही है। सर्वश्रेष्ठ समूह के पुरस्कार के रूप में 15 हजार रुपये मिल चुके हैं।
-नवीन लता, सचिव, नव ज्योति स्वयं सहायता समूह सिहन
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