मंडी। जिला न्यायालय के न्यायाधीश ने मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम के तहत दायर करीब 55 याचिकाओं को खारिज करने के फैसले सुनाए हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण तथा राजमार्ग के निर्माण से प्रभावितों ने सुलह अधिनियम के तहत मध्यस्थ मंडलायुक्त के अवार्डों को जिला न्यायालय में याचिकाओं के माध्यम से चुनौती दी थी।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा चंडीगढ़-मनाली और पठानकोट-मंडी राजमार्गों को फोरलेन करने का काम इन दिनों जारी है। फोरलेन के निर्माण के लिए भूमि का अधिग्रहण किए जाने से जिला बिलासपुर, मंडी और कुल्लू के हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। जिला न्यायालय और मध्यस्थ न्यायालय में इस समय भू अधिग्रहण के अवार्ड से संबंधित सैकड़ों याचिकाएं लंबित हैं। इनमें से अनेकों मामलों का निस्तारण भी हो चुका है। अधिकांश मामलों में राजमार्ग प्राधिकरण ने प्रभावितों के अवार्डों को मध्यस्थ न्यायालय द्वारा बढ़ाए जाने के खिलाफ दायर याचिकाएं हैं। जिला न्यायालय में राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया गया है।
इसके अलावा राजमार्ग से प्रभावित हुए लोगों ने भी मध्यस्थ के अवार्ड को चुनौती दी थी। जिला न्यायाधीश ने याचिकाओं के फैसले में कहा कि तथ्यों, परिस्थितियों और साक्ष्यों से यह साबित नहीं हुआ है कि अवार्ड को किसी धोखाधडी, भ्रष्टाचार करके या भारतीय कानून के किसी मूल नीति और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की अवहेलना करके पास किया गया है। याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर पाए कि मध्यस्थ के अवार्ड किस तरह पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं।
जिला अदालत ने उच्चतम न्यायालय के फैसलों में दी गई व्यवस्थाओं और मामलों के तथ्यों के आधार पर यह माना कि मध्यस्थ ने तथ्यों का सही तरीके से और सत्यतापूर्वक मूल्यांकन किया है। अदालत ने कहा कि मध्यस्थ के अवार्ड में किसी तरह की अयोग्यता, अवैधता और अनियमितता नहीं है। ऐसे में अदालत ने अवार्ड को बरकरार रखते हुए याचिकाओं को निरस्त करने के फैसले सुनाए हैं।