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Mandi Cloudburst: 30 जून की रात त्रासदी में देजी गांव के इंद्र सिंह की दुनिया उजड़ी, पत्नी समेत 3 बेटियां बहीं

Fri, 11 Jul 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा हेम सिंह ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, थुनाग (सराज)।

सार

30 जून की रात त्रासदी में इंद्र सिंह की दुनिया उजड़ गई। उनकी पत्नी भुवनेश्वरी और तीन बेटियां एकता, दिवांशी, और कामाक्षी मकान समेत बाढ़ में बह गए। वहीं, देजी गांव में बाढ़ ने दो परिवारों के 11 लोगों को छीन लिया, जिनमें नौ एक ही परिवार के हैं।
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आपदा प्रभावितों से मिलते मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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बरसात का सैलाब भले ही थम गया हो, लेकिन सराज के गांवों में आंसुओं का सैलाब अब भी उमड़ रहा है। लोग सदमे में डूबे हैं। त्रासदी में सदियों तक न भूलने वाला सदमा मिला है। चूल्हे ठंडे पड़े हैं। राहत शिविरों में रातें कट रही हैं, जहां भूख और ठंड के बीच अपनों को खोने का दर्द हर पल सता रहा है। दस दिन बीत गए। आपदा से उबरना असंभव सा लग रहा है। अपनों को खोने का गम प्रभावित भुलाए नहीं भूल पा रहे हैं। मुख्यमंत्री सुक्खू काफिला छोड़कर पैदल पखरैर पंचायत के रील गांव पहुंचे और प्रभावितों का ढांढस बंधाया।

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30 जून की रात सराज के लिए भयावह त्रासदी बन गई। प्रकृति ने चंद मिनटों में ऐसा कहर बरपाया कि गांवों का नक्शा ही मिट गया। देजी गांव में बाढ़ ने दो परिवारों के 11 लोगों को छीन लिया, जिनमें नौ एक ही परिवार के हैं। थुनाग में एक परिवार के चार लोग अपने घर समेत लापता हो गए। यह आपदा सिर्फ घर नहीं, सपनों, रिश्तों और उम्मीदों को भी बहा ले गई।

इस त्रासदी में इंद्र सिंह की दुनिया उजड़ गई। उनकी पत्नी भुवनेश्वरी और तीन बेटियां एकता, दिवांशी, और कामाक्षी मकान समेत बाढ़ में बह गए। इंद्र उस जगह की ओर मुड़कर भी नहीं देखना चाहता, जहां कभी उसका घर था। दूसरी ओर मुकेश की कहानी और भी हृदयविदारक है। बेटी की सलाह पर वह घर नहीं गया, सिर्फ फोन पर बात हुई थी। उनकी चार वर्षीय जुड़वां बेटियां सुभांशी और उर्वशी, आठ साल के बेटे सुरांश के साथ काल के गाल में समा गईं। मुकेश अब हताश है।
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देजी गांव में कभी 35 लोग हंसी-खुशी रहते थे, अब 11 लोगों को खो चुका है। रोशन लाल, विशन जैसे कई नाम अब सिर्फ यादों में बचे हैं। देजी पखरैर पंचायत में उस रात 51 घर, 15 गोशालाएं, एक स्कूल, एक हेल्थ सब सेंटर, एक आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी और एक पशु चिकित्सालय सैलाब की भेंट चढ़ गए। मुकेश अपने भाई के साथ रह रहा है जबकि इंद्र सिंह गांव छोड़कर अपने भाई के साथ रहने ज्यूणी वैली में चला गया है।
 
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