विधि विभाग ने अपनी विस्तृत टिप्पणी में ये कहा
इस फैसले के क्रियान्वयन को लेकर शिक्षा विभाग ने विधि विभाग से राय मांगी थी। अब विधि विभाग ने अपनी विस्तृत टिप्पणी में साफ किया है कि न्यायालय के निर्णय को लागू करना ही उचित होगा। विधि विभाग ने भर्ती एवं पदोन्नति नियमों का हवाला देते हुए कहा है कि हेड टीचर का पद 100 प्रतिशत पदोन्नति के माध्यम से पात्र जेबीटी शिक्षकों से भरा जाता है। इसलिए इसे केवल पदस्थापन या पदनाम परिवर्तन नहीं माना जा सकता। विभाग के अनुसार जब नियम स्वयं इस पद को पदोन्नति के रूप में परिभाषित करते हैं, तो इससे जुड़े सभी सामान्य लाभ भी कर्मचारियों को मिलने चाहिए।
नियमों में वेतन निर्धारण, पदोन्नति वृद्धि और अन्य सेवा लाभ शामिल
इनमें वेतन निर्धारण, पदोन्नति वृद्धि और अन्य सेवा लाभ शामिल हैं। विधि विभाग ने कहा है कि वित्तीय नियम एफआर-22 के तहत उच्च पद पर पदोन्नति होने पर कर्मचारी वेतन निर्धारण और पदोन्नति वृद्धि के हकदार होते हैं। इन लाभों को केवल कार्यपालिका के निर्देशों के आधार पर रोका नहीं जा सकता। भले ही जेबीटी शिक्षक और हेड टीचर के वेतनमान समान हों, लेकिन हेड टीचर का पद अधिक जिम्मेदारियों वाला पद है। ऐसे में पदोन्नति का उद्देश्य कर्मचारियों को प्रोत्साहित करना और उनकी अतिरिक्त जिम्मेदारियों को मान्यता देना है।
प्रशासनिक निर्देश भर्ती एवं पदोन्नति नियमों को नहीं बदल सकते: विधि विभाग
विधि विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक निर्देश भर्ती एवं पदोन्नति नियमों को न तो बदल सकते हैं और न ही उनके प्रभाव को सीमित कर सकते हैं। यदि सरकार भविष्य में हेड टीचर पद को पदोन्नति के बजाय प्लेसमेंट के आधार पर भरना चाहती है तो इसके लिए पहले भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में विधिवत संशोधन करना होगा। विभाग ने कहा कि जब तक नियमों में संशोधन नहीं होता, तब तक मौजूदा प्रावधान लागू रहेंगे और पदोन्नति से जुड़े लाभ कर्मचारियों को दिए जाने होंगे। विधि विभाग ने अपने निष्कर्ष में कहा है कि उच्च न्यायालय के निर्णय को आगे चुनौती देने से कोई सार्थक परिणाम निकलने की संभावना नहीं है। इसलिए शिक्षा विभाग को फैसले के क्रियान्वयन की दिशा में आवश्यक कदम उठाने चाहिए। इसी कड़ी में शिक्षा सचिव की ओर से स्कूल शिक्षा निदेशालय को पत्र भेज कर मामले में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।