दुर्घटनास्थल/ लेफ्टिनेंट कर्नल भानु प्रताप सिंह मनकोटिया का फाइल फोटो
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बलिदानी भानु प्रताप सिंह मनकोटिया और उनका परिवार सेना में बड़े ओहदे पर रहकर भी अपनी जड़ों को नहीं भूल पाया। यह वजह है कि यह परिवार हर साल कांगड़ा जिला के तियारा में स्थित अपने गांव की मिट्टी से जुड़ा रहा। शहर में बसने के बावजूद इस परिवार का संपर्क अपने गांव तियारा से नहीं टूटा। हालांकि बलिदानी भानु प्रताप सिंह मनकोटिया अपने परिवार समेत लंबे समय से पठानकोट में रहते थे।
उनके दादा और पिता भी सेना में रहे हैं और उन्होंने पंजाब के पठानकोट में अपना घर बना लिया। बताया जा रहा है कि बलिदानी भानु प्रताप सिंह मनकोटिया का जन्म पठानकोट स्थित घर पर हुआ और पढ़ाई-लिखाई भी वहां हुई। इसके बाद वह सेना में भर्ती हो गए, लेकिन गत दिवस लद्दाख में सेना के वाहन पर पत्थर गिरने से उनकी मौत हो गई । इस हादसे में एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक लांस दफादार बलिदान हो गए, जबकि तीन अन्य अधिकारी घायल हो गए।
तियारा पंचायत के पूर्व प्रधान संदीप मनकोटिया ने बताया कि सारा परिवार बीते जून ही यहां अपने घर पर अपनी खेती-बाड़ी को देखने और अपने रिश्तेदारों से मिलने आया था। यह परिवार गांव में हर साल जून महीने में धाम आदि का कार्यक्रम भी करते रहे हैं। भानु प्रताप सिंह मनकोटिया अभी जून महीने ही अपने गांव आए थे। उनके पिता कर्नल रिटायर रमन पाल सिंह मनकोटिया और उनके पड़दादा सूबेदार उधम सिंह भी सेना में थे। यह घटना सुनते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। लोगों का कहना है कि पिछले कुछ महीने ही हमसे मिलकर गए थे। भानु प्रताप के घर में पिता-माता, पत्नी और डेढ़ साल का बेटा है।