पिछले साल के मुकाबले 3000 रुपये कम मिल रहे प्रतिकिलो दाम
चीन की गुच्छी ने भी डाला असर, अभी कुल्लू नहीं पहुंचे व्यापारी
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। फरवरी और मार्च में हुई बारिश-बर्फबारी के चलते गुच्छी की अच्छी पैदावार हुई है। बंजार, सैंज, पार्वती घाटी, खराहल, कशावरी आदि क्षेत्रों में ग्रामीण जंगलों और बगीचों में गुच्छी की तलाश में जुटे हैं।
गुच्छी का कारोबार इस बार मंदा पड़ा हुआ है। गुच्छी बाजार में महज 5,000 रुपये प्रतिकिलो तक बिक रही है। पिछले साल शुरुआती दौर में ग्रामीणों को गुच्छी के 8,000 रुपये तक दाम मिले थे। गुच्छी के दाम कम मिलने से ग्रामीणों में निराशा है। आने वाले दिनों में गुच्छी के दामों में उछाल आने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि चीन में हो रही गुच्छी की पैदावार के चलते प्रदेश में जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली गुच्छी के व्यापार पर असर पड़ रहा है। खरीदारों को चीन की गुच्छी आसानी से सस्ती उपलब्ध हो रही है। इससे यहां पर गुच्छी का कारोबार लगातार प्रभावित हो रहा है। प्रदेश में बाहरी राज्यों से गुच्छी की खरीद के लिए आने वाले व्यापारी अभी तक कल्लू नहीं पहुंचे हैं।
ग्रामीण प्रेम चंद ठाकुर, टेक राम और जगरनाथ ने कहा कि गुच्छी से अच्छी आमदनी होती है। दाम कम मिलने से उन्हें निराशा का सामना करना पड़ा है। गुच्छी के जब ग्रामीणों को अच्छे दाम मिलेंगे तो उन्हें लाभ अधिक होगा। उन्होंने कहा कि अप्रैल में जंगलाें और बगीचों में गुच्छी की तलाश में लोग डटे रहेंगे। गुच्छी के व्यापारी राकेश ने कहा कि आने वाले दिनों में गुच्छी के दामों में इजाफा होने की उम्मीद है। संवाद