पर्यटन अभियान...
मणिकर्ण की पहाड़ियों में भटक जाते हैं रास्ता, रेक्स्यू अभियान चलाकर निकालने पड़ते सैलानी
सरकार और प्रशासन नहीं दे रहे ध्यान, पर्यटकों को भुगतना पड़ता है खामियाजा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। मणिकर्ण घाटी में हजारों पर्यटक आते हैं लेकिन पर्यटन सूचना केंद्र के अभाव में उन्हें सही जानकारी नहीं मिल पाती है। इस कारण कई पर्यटक रास्ता भटककर पहाड़ों में लापता हो जाते हैं। अब तक कई देसी और विदेशी पर्यटक मणिकर्ण घाटी की पहाड़ियों में लापता हो चुके हैं। सरकार और प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, इसका खामियाजा पर्यटकों को भुगतना पड़ रहा है।
मणिकर्ण घाटी में कसोल, मलाणा, बरशैणी, मणिकर्ण आदि कई स्थल हैं, जो विदेशी पर्यटकों की पसंदीदा जगह हैं। कसोल को मिनी इस्राइल भी कहा जाता है। यहां पर सालभर विदेशी सैलानी नजर आते हैं। घाटी में आने वाले सैलानी जब पहाड़ों पर ट्रैकिंग पर निकलते हैं तो जानकारी के अभाव में वे अक्सर रास्ता भूल जाते हैं। लापता होने पर उन्हें रेस्क्यू करना पड़ता है।
कई पर्यटक हादसों का शिकार भी हो जाते हैं। मणिकर्ण घाटी में निजी सर्च एवं रेस्क्यू इकाइयां हैं, जिनकी मदद लेकर पुलिस रास्ता भटकने वाले सैलानियों को तलाश करती है। मणिकर्ण घाटी के गुरदयाल सिंह, चित्रदेव और मान सिंह ने कहा कि घाटी में पर्यटकों की सुविधा के लिए जरूरी है कि यहां पर पर्यटन सूचना केंद्र स्थापित हो। पर्यटक ट्रैकिंग पर जाने से पहले और घाटी की अन्य जानकारी आसानी से ले सकता है। इससे यहां पर पर्यटकों के साथ पेश आने वाले हादसों में भी कमी आएगी।
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कैंपिंग, होटल और होम स्टे में एंट्री रजिस्टर में पर्यटकों की पूरी जानकारी रखी जाए। ट्रैकिंग रूट पर चेकपोस्ट होनी चाहिए। पर्यटन सूचना केंद्र स्थापित करने के संबंध में उपायुक्त को एक ज्ञापन भी यूनियन की ओर से सौंपा गया है। अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
-डीआर सुमन, पार्वती वैली एडवेंचर टूअर ऑपरेटर यूनियन
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पुलिस पर्यटकों से विभिन्न माध्यमों से अपील करती है कि जोखिम भरे स्थानों की ओर न जाएं। जिले में आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा के लिए कुल्लू पुलिस बचनवद्ध है।
-डॉ. कार्तिकेयन गोकुल चंद्रन, पुलिस अधीक्षक, कुल्लू