सब्जी मंडी में टमाटर की खेप लेकर पहुंचे किसान।
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कुल्लू। जिले की सब्जी मंडियों में लाल टमाटर महज पांच रुपये किलो तक बिक रहा है। टमाटर कौड़ियों के भाव बिकने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों की टमाटर पर मेहनत भी नहीं निकल पा रही है।
महाराष्ट्र के नासिक से टमाटर स्थानीय मंडियों में आने से घाटी के किसानों को नुकसान झेलना पड़ा है। इस साल टमाटर सीजन की शुरूआत से लेकर अब तक किसानों को फसल का अच्छा भाव नहीं मिल पाया है। शुरूआत से ही टमाटर महज 10 से 12 रुपये प्रति किलो बिकता आया है। लेकिन अब सीजन के रफ्तार पकड़ते ही टमाटर के दाम धड़ाम हो गए हैं। इससे किसान आर्थिक संकट की मार झेल रहे हैं। लाल सोना नाम से मशहूर हिमाचली टमाटर के दाम लगातार लुढ़क रहे हैं। इस साल किसानों को टमाटर के अच्छे दाम मिलने की उम्मीद थी। लेकिन सब्जी मंडियों में इसके विपरीत किसानों को उनकी फसल के दाम मिल रहे हैं। यह घाटी के किसानों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। जुलाई और अगस्त माह में टमाटर के भाव गिरने से किसान परेशान हैं। घाटी के किसान जयचंद, धनीराम, बुधराम, वेद प्रकाश, जीवन लाल, दुनीचंद, प्यारे लाल, उत्तम राम ने कहा कि जुलाई में टमाटर 12 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा था। लेकिन अगस्त में टमाटर पांच से दस रुपये के भाव तक सिमटकर रह गया है। ऐसे में किसानों को मेहनताना और भाड़ा निकालना भी मुश्किल हो गया है। उधर, इस संबंध में कुल्लू और स्नोअर वैली आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष खुशाल ठाकुर ने कहा कि महाराष्ट्र के टमाटर ने सब्जी मंडियों में दस्तक दे दी है। इसी वजह से दामों में लगातार गिरावट आ रही है।