संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। देवभूमि के नाम से विख्यात कुल्लू घाटी में बादल फटने की घटनाएं जोर पकड़ने लगी हैं। पारली पंचायत के हुरला नाले के शिलागढ़ में शनिवार दोपहर करीब 2:30 बजे बादल फटने से आई बाढ़ ने लगभग 25 किलोमीटर तक तबाही मचाई।
हालांकि इसमें किसी तरह के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन लोग बाढ़ से सहम से गए। बाढ़ की खौफनाक आवाज सुनकर हुरला नाले के आसपास बसे गांव में अफरातफरी मच गई। लोगों ने शोर मचाकर, सीटियां बजाकर तथा फोन कर लोगों को सतर्क किया। खासकर नाले किनारे बसे गड़सा, हुरला, ठेला, झूणी, भेडूफार्म तथा नीणूनाला गांव के लोग बादल फटने की सूचना और बाढ़ का शोर सुनकर घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित जगहों की ओर भागे।
पारली पंचायत में फटे बादल की बाढ़ का पानी और मलबा गड़सा, मंजली, दियार और हुरला पंचायत से गुजरते हुए ब्यास नदी में समा गया। बाढ़ से सबसे अधिक नुकसान वन विभाग को हुआ है। शिलागढ़ के साथ पहाड़ी में तेज बारिश से बादल फटने पर जंगल में तबाही मची है। बाढ़ अपने साथ देवदार, रेई तथा तोष के कई विशालकाय पेड़ों को बहाकर पाई। हालांकि, करीब आधक घंटे के बाद बाढ़ का जलस्तर कम हुआ और लोगों ने राहत की सांस ली। बादल फटने के बाद आई बाढ़ ने अपना रुख नहीं बदला और नाले से होकर बहते हुए ब्यास नदी में जा पहुंची, जिस कारण जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है। पारली पंचायत के प्रधान राज मल्होत्रा ने कहा कि बादल फटने से आई बाढ़ से बहुत नुकसान हुआ है। गड़सा पंचायत के प्रधान गंभीर सिंह ने कहा कि किसी तरह के जानमाल का नुकसान नहीं है। अतिरिक्त दंडाधिकारी कुल्लू प्रशांत सरकैक ने कहा कि प्रशासन को बादल फटने की सूचना मिली है। राजस्व विभाग से नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट मांगी है।