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सैंज अस्पताल का दर्जा ही बढ़ा, सुविधाएं नहीं

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संवाद न्यूज एजेंसी
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सैंज (कुल्लू)। जिला कुल्लू के सैंज अस्पताल को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा मिला है, लेकिन इसको उस तरह की सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं।
अस्पताल का दर्जा बढ़े हुए सात साल हो चुके हैं। आलीशान भवन का निर्माण भी किया गया है, लेकिन अभी तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं मिले हैं। इससे मरीजों को उपचार करवाने के लिए 60 किमी सफर कर क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू पहुंचना पड़ रहा है। सैंज अस्पताल वर्तमान में दो डॉक्टर के सहारे चल रहा है। हालांकि सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सैंज को 25 बिस्तरों की सुविधा भी दी है, लेकिन आज दिन तक एक भी मरीज को उपचार के लिए भर्ती नहीं किया गया है। इस स्वास्थ्य केंद्र के तहत सैंज घाटी की 20 पंचायतों की करीब 25 हजार आबादी आती है। स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाएं नहीं मिलने से सबसे ज्यादा दिक्कतें घाटी की गर्भवती महिलाओं को पेश आ रही हैं। क्षेत्र के ग्रामीणों के साथ-साथ परियोजनाओं के मजदूरों को भी बीमार होने पर कुल्लू का रुख ही करना पड़ रहा है। यहां औसतन 100 मरीज इलाज के लिए प्रतिदिन पहुंचते हैं। मरीजों के लिए यहां सभी तरह की दवा उपलब्ध नहीं रहने के कारण मजबूरन बाहर से खरीदनी पड़ती है। स्थानीय निवासी लाल चंद, दुनी चंद, श्याम लाल, भाग चंद, शेर सिंह, लोतराम, राज कुमार, तिलक राज, मीने राम, रोशन लाल, फते चंद, नीलम कुमार, किशोरी लाल और तापे राम का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को कई बार डॉक्टरों की नियुक्ति करनेे के लिए अवगत करवाया है, लेकिन मांग गंभीरता के साथ पूरी नहीं की जा रही है। उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कुल्लू डॉ. सुशील चंद्र शर्मा ने बताया कि सैंज अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद भरने के लिए शिमला पत्राचार किया है।
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ऑक्सीजन की भी है व्यवस्था
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सैंज में आपात स्थिति में मरीजों के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई है। यहां ऑक्सीजन सिलिंडर भी उपलब्ध है। अस्पताल में एक्सरे की सुविधा है, लेकिन कर्मचारी न होने की वजह से लोगों को बाहर टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। आपताकालीन व ओपीडी सुविधा उपलब्ध न होने से जनता दिक्कतों का सामना कर रही है।
डॉकटरों के पांच में से तीन पद खाली
अस्पताल में चिकित्सकों के पांच में से तीन पद खाली चल रहे हैं। फिलहाल यहां दो चिकित्सक तैनात हैं। फार्मासिस्ट के दो, स्टाफ नर्स के तीन, अधीक्षक, एक्सरे तकनीशियन, स्वच्छता निरीक्षक, वार्डन, ड्रेसर और चौकीदार के एक-एक पद खाली चल रहे हैं।
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इन पंचायतों के लोग हैं अस्पताल पर निर्भर
घाटी की देहुरीधार, शैंशर, गाड़ापारली, शांघड़, सुचैहण, बनोगी, दुशाहड़, धाउगी, कनौन, लारजी, कोटला, चकुरठा, थाटीबीड़, गोपालपुर, भलाहण, तलाड़ा, देवगढ़ गोही, रैला-एक और रैला-दो पंचायतों के लोग और परियोजनाओं के सैकड़ों कर्मचारी का स्वास्थ्य सैंज अस्पताल पर निर्भर है।
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