कुल्लू के अटल सदन में हस्तशिल्प व हथकरघा के कारीगरों के साथ संवाद कार्यक्रम में पहुचें केंद्रीय ?
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कुल्लू। कोरोना के चलते कुल्लवी टोपी, शॉल, मफलर आदि बनाने वाले हथकरघा उद्योग पर काफी असर पड़ा है। कारीगरों ने कोरोना के दौरान उत्पाद तो तैयार कर लिए, लेकिन उनका स्टॉक डंप पड़ा हुआ है। पर्यटक कोरोना में कुल्लू घाटी में नहीं आ पाए। इस कारण उन्हें अपने उत्पादों की ब्रिकी में परेशानी आई है।
रविवार को वाणिज्य एवं उद्योग उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली मंत्री पीयूष गोयल ने बुनकरों से संवाद किया। बुनकर ओमप्रकाश ने कहा कि ऊन की सही कीमत मिलनी चाहिए।
इसके साथ ही मार्केटिंग के लिए हाट मिलनी चाहिए। शॉल कारीगर रूपेश कुमार ने कहा कि 15 साल से शॉल बनाने का काम कर रहा हूं। कुल्लवी टोपी की तर्ज पर कुल्लवी साड़ी पर काम किया जा रहा है। इसकी बाजार में भी काफी डिमांड है। किरण कुमार ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2017 से ई कॉमर्स का बिजनेस चला रहा है। हर घर तक पहुंचने की कोशिश। बुनकरों को वाजिब दाम दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शॉल बुनकर उत्तम चंद ने कहा कि उन्होंने अपने पिता से सीखा काम। कोरोना के चलते कारोबार ठप है। किन्नौरी शॉल बुनकर गुलाब चंद ने कहा कि कोरोना से बिक्री की समस्या आई। बड़े स्तर पर प्रदर्शनी लगाई जानी चाहिए। जिन बुनकरों ने 50 हजार तक मुद्रा लोन भी लिए हैं। उनका ब्याज माफ किया जाए। जगतसुख की ज्वाला शर्मा ने कहा कि उनके साथ 300 महिलाएं जुड़ी हैं, लेकिन पर्यटक न आने से बिक्री में समस्या आ रही है। कोरोना से हुए घाटे की भरपाई के लिए कारीगरों को छोटे पैकेज दिए जाएं। केंद्रीय मंत्री ने शानदार कार्य के लिए अपने सम्मान के तौर पर दिए गए मफलर को देकर ज्वाला शर्मा को सम्मानित भी किया।