लाहौल में प्यूकर गांव में गोची उत्सव में पूजा में भाग लेते ग्रामीण।-संवाद
केलांग (लाहौल स्पीति)। लाहौल घाटी के प्यूकर गांव में ग्रामीणों ने देवी-देवताओं के देवलोक से धरती पर पधारने के लिए पूजा-पाठ किया। ग्रामीणों ने पारंपरिक वेशभूषा में बर्फ के बीच देवताओं को खुश करने के लिए शैणी नृत्य किया। 20 घरों की आबादी वाले प्यूकर गांव के लोगों ने वर्तमान में भी अपनी पुरातन संस्कृति को संजो कर रखा है।
पामा नमज्ञाल के अनुसार, उनके बुजुर्ग बताते थे कि सदियों पहले गोची उत्सव में पूजा-पाठ का समय रहता था तो रात के समय देवलोक से देवगण सफेद घोड़े में सवार दिखते थे। दो दशक पहले उन्होंने स्वयं गोची उत्सव में पूजा पाठ के निर्वहन के समय बर्फ गिरते देखी है। यह गांव लाहौल घाटी का एकमात्र ऐसा गांव है जहां गोची में बेटी के जन्म पर भी पूजा पाठ और धाम का आयोजन किया जाता है। यह त्योहार समूची गाहर घाटी में मनाया जाता है।
प्यूकर गांव में पुत्र के साथ-साथ पुत्री के जन्म पर भी गोची पर्व मनाया जाता है। 22 दिसंबर 2023 से पहले इस गांव में पुत्र या पुत्री जो भी जन्मे, उस घर में गोची उत्सव की धूम रही। प्यूकर गांव में इस बार दो पुत्रियों ने जन्म लिया है। सोनम जंगपो के घर शुक्रवार को बेटी के जन्म पर जश्न मनाया गया तो रविवार को छेरिंग पलजोर के घर रौनक रही।
ग्रामीण पामा नमज्ञाल ने बताया सोमवार सुबह 11:00 बजे ग्रामीणों ने पारंपरिक परिधान में सजकर पूजा पाठ कर देवलोक से देवी-देवताओं को धरती पर आने का निमंत्रण दिया। उसके बाद शैणी नृत्य किया। गांव के सभी लोगों ने जिनके घर बेटी का जन्म हुआ है, वहां जश्न मनाया। रात्रि 12:00 बजे के आसपास भोज पत्र पर अंकित याक के चित्र पर तीर छोड़ने की पुरातन परंपरा का निर्वहन किया। संवाद