लाहौल घाटी के शांशा नाले में पैदल पुल बनने के बाद सब्जियों को ले जाते मजदूर।
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केलांग (लाहौल-स्पीति)। शांशा नाले में अस्थायी पैदल पुल बनने से पट्टन घाटी के किसानों को आंशिक राहत मिली है। पिछले कुछ दिनों से खेतों में ही फंसी गोभी, ब्रोकली और मटर की नगदी फसलें अब पुल से होकर देश की मंडियों में पहुंचने लगी है।
हालांकि सात दिनों के भीतर उदयपुर उपमंडल समेत पट्टन घाटी के कई क्षेत्रों में ट्रकों में लोड सब्जियां तथा खेतों में ही गोभी, मटर और ब्रोकली की फसलें खराब हो गई थी। अब किसान अपनी बची नगदी फसलों को शांशा पुल से पीठ पर ढोकर वाहनों तक पहुंचा रहे हैं। जहां से सब्जियों को मंडियों तक पहुंचाया जा रहा है। पैदल पुल बनने से शंशा, जोबरंग, रापे, राशिल, फूड़ा, कोठी, रपडींग और गोहरमा गांव के किसानों की नगदी फसल मंडियों तक पहुंचाई जा रही हैं। किसान सुरेश, सुरेंद्र, अशोक, रमेश ने कहा कि शांशा पुल और उसके साथ लगती सड़क बाढ़ की भेंट चढ़ी है। इसके चलते एक सप्ताह से नाले के आर-पार आवाजाही ठप रही है। अब नाले में अस्थायी पैदल पुल बनने के बाद नगदी फसलों को मंडियों तक पहुंचाने में थोड़ी आसानी हुई है। जाहलमा नाले में सोमवार को बीआरओ ने अस्थायी सड़क का निर्माण कर दिया है। तहसीलदार केलांग नरेंद्र ने कहा कि बीआरओ ने रविवार को शांशा नाले में अस्थायी पुल का निर्माण किया है।