उदयपुर (लाहौल-स्तीति)। शिक्षा और स्वास्थ्य के सुधारीकरण को लेकर सरकारें बड़े-बड़े दावे तो करती आई हैं मगर धरातल सभी दावे झूठे साबित हो रहे हैं। बात राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक जाहलमा की हो रही है। सरकार ने पाठशाला को आदर्श स्कूल का दर्जा तो दे दिया है, लेकिन यहां मेडिकल की पढ़ाई जुगाड़ के सहारे चल रही है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए स्कूल प्रबंधन समिति ने दो अध्यापकों को अपने स्तर पर तैनात किया और उनका मानदेय अभिभावक स्वयं दे रहे हैं। पाठशाला में पीजीटी फिजिक्स का पद नवंबर 2016 से खाली चल रहा है। टीजीटी नाॅन मेडिकल पद जनवरी 2019, टीजीटी मेडिकल दिसंबर 2022, अधीक्षक ग्रेड -दो फरवरी 2021, वरिष्ठ सहायक जुलाई 2006 और सहायक तकनीशियन का पद 1995 से खाली चल रहा है। स्कूल में सफाई कर्मी भी तैनात नहीं है। आदर्श स्कूल जाहलमा में इस समय महज 48 बच्चे अध्ययनरत हैं। एसएमसी अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने बताया कि कई बार जाहलमा स्कूल में रिक्त पदों का ब्यौरा लिखित में स्थानीय विधायक को दिया है। अभिभावकों ने सरकार से आग्रह किया है आदर्श स्कूल जाहलमा के साथ कैंपस स्कूलों में भी रिक्त अध्यापकों के पद भरा जाए।
तीन कैंपस स्कूलों में भी अध्यापकों के कई पद रिक्त
राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला जाहलमा के साथ ही स्कूल के अधीन कैंपस स्कूलों में अध्यापकों के रिक्त पद अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बने हैं। तीन कैंपस मिडल स्कूल गोहरमा, नालडा और जसरथ तीनों स्कूल में टीजीटी आर्ट्स, टीजीटी नाॅन मेडिकल और शारीरिक शिक्षा अध्यापक (पीईटी) के पद वर्षों से खाली पड़े हैं। गोहरमा स्कूल में कला अध्यापक और मिडल स्कूल जसरथ में एक चतुर्थ कर्मी भी तैनात नहीं है। लाहौल घाटी में कई ऐसे और भी स्कूल है जहां अभिभावक अध्यापकों की कमी का रोना रो रहे हैं। यही वजह है कि लाहौल घाटी में साल दर साल बच्चों की तादाद घट रही है। बच्चे शिक्षा ग्रहण करने के लिए जिला से बाहर पलायन हो रहे हैं।
......संवाद