पहले भाजपा ने आजाद उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े सुरेंद्र शौरी को उपाध्यक्ष बनाने के संकेत दिए थे, लेकिन ऐन मौके पर आनी उपमंडल के जिप सदस्यों ने मोर्चा खोल दिया है कि आनी उपमंडल में किसी एक को उपाध्यक्ष पद मिले। भाजपा की शशी कटोच ने चार हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की है।
वहीं भाजपा में भी उनकी पैठ अच्छी बताई जा रही है। क्योंकि संगठन में रहते हुए उन्होंने विस और लोक सभा चुनावों में भी उनके क्षेत्र के सभी बूथों से भाजपा को लीड मिली थी। वहीं जिप सदस्यों का भी एक तपका अंदरखाते उनके साथ खड़ा है।
दूसरी ओर पार्टी में यह बात भी चल रही है कि अगर पार्टी विरोधी कार्य के लिए आनी और मणिकर्ण से पार्टी अपने लोगों को बाहर का रास्ता दिखा सकती है, लेकिन शौरी के बारे में पार्टी ऐसा कदम क्यों नहीं उठा रही है, जबकि उन्होंने भी तो पार्टी के निर्णय का विरोध कर भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़े थे। ऐसे में उनके खिलाफ पार्टी का रुख क्यों नर्म है? ऐसे में अगर शौरी को उपाध्यक्ष बनाने पर जोर दिया गया जो पार्टी दो गुटों में भी बंट सकती है।
वहीं आज तक आनी उपमंडल को कभी न ही अध्यक्ष का पद मिला है न ही उपाध्यक्ष का। ऐसे में पार्टी के लिए यह मजबूरी बन गया है कि उपाध्यक्ष पद आनी को दिया जाए। अगर ऐसा होता है तो शशी कटोच का उपाध्यक्ष बनना तय है। हालांकि ऊंट किसी ओर करवट बदलता है यह तो 27 दिसंबर को ही साफ हो पाएगा।