कुल्लू। आउटसोर्स कर्मचारी पिछले लंबे समय से प्रदेश सरकार से नियमितीकरण के लिए स्थायी नीति बनाने की मांग कर रहे हैं। उनको आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं मिल पाया है। हालांकि सरकार ने इसके लिए कमेटी का गठन किया है।
कमेटी की ओर से अभी तक कोई सकारात्मक निर्णय आउटसोर्स कर्मचारियों के पक्ष में नहीं लिया गया है। ऐसे में अब आउटसोर्स कर्मचारी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर रहे हैं। आउटसोर्स कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार को 30 जून तक अल्टीमेटम दिया है। अगर सरकार इस समय अवधि के बीच नियमितीकरण की स्थायी नीति नहीं बनाती है, तो कर्मचारी पेन डाउन स्ट्राइक कर सकते हैं।
एनएचएम की स्टाफ नर्स पिंगला ठाकुर और कमला शर्मा ने कहा कि उन्हें नाममात्र का वेतन दिया जा रहा है। पिछले सात सालों से वेतन नहीं बढ़ाया गया और न ही कोई अन्य सुविधाएं प्रदान की जा रही है। उधर, आउटसोर्स कर्मचारी संघ के अध्यक्ष महेंद्र सिंह ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारी वर्तमान में हर विभाग में शोषित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि जल शक्ति विभाग में तैनात आउटसोर्स कर्मचारियों से छह के बजाय 12 घंटे का काम लिया जा रहा है और वेतन महज 3500 रुपये प्रति माह दिया जा रहा है। आसटसोर्स कर्मचारी नियमित कर्मचारियों की तरह पूरा काम कर रहे हैं। इसके बाद भी उन्हें नाममात्र का वेतन दिया जा रहा है। कहा कि सरकार आगामी कैबिनेट बैठक में सकारात्मक फैसला नहीं लेती है तो आसटसोर्स कर्मचारी आंदोलन का रुख करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि बेरोजगार संघ भी आउटसोर्स कर्मचारी संघ के साथ मिलकर आउटसोर्स प्रथा को समाप्त करवाने में सहयोग करें।