जसरथ गांव से गुजरती चंद्रभागा नदी। जलस्तर बढ़ने से गांव के खेत खलिहान पानी से भर जाते हैं।
केलांग (लाहौल-स्पीति)। उपमंडल उदयपुर में वामतट पर बसा जसरथ गांव और यहां की जमीन जाहलमा नाले में आई बाढ़ के बाद खतरे की जद में है। जमीन और गांव को बचाने के लिए तटीकरण जरूरी है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते तटीकरण को नजरअंदाज किया तो आने वाले समय में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
बीते दो-तीन साल से जाहलमा नाले की बाढ़ से चंद्रभागा नदी उफान पर आ जाती है। इससे जसरथ गांव के साथ फूड़ा, हालिंग, जाहलमा और तड़ंग के किसानों की कई बीघा जमीन और सेब बगीचों को नुकसान पहुंचा। नदी का रुख बार-बार बदलने से जसरथ गांव को भारी खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों ने सरकार, प्रशासन से आग्रह किया कि जसरथ गांव को बचाने के लिए कदम उठाए जाएं। इसके लिए नदी किनारे तटीकरण जरूरी है, अन्यथा भूमि कटाव के चलते जसरथ गांव कभी भी खतरे में पड़ सकता है।
19 अगस्त, 2021 को जाहलमा नाले की बाढ़ ने जसरथ गांव को जाहलमा से जोड़ने वाले फुटब्रिज को क्षति पहुंचाई थी। नालडा पंचायत के उपप्रधान विकास जस्पा ने कहा कि जसरथ को बचाने के लिए चंद्रभागा नदी के किनारे आरसीसी की दीवार लगाई जाए। जाहलमा नाले में पिछले दो-तीन सालों से जून-जुलाई में भारी बाढ़ आ रही है जो नुकसान पहुंचा रही है। सरकार और प्रशासन को इस गांव की सुध लेनी चाहिए। संवाद