लगघाटी के काहिका उत्सव को देखते लोग।
कुल्लू। जिला कुल्लू को देवभूमि कहा जाता है। यहां पर आज भी दैवीय शक्तियां देखने को मिलती हैं। जिला मुख्यालय के साथ लगती लगघाटी के फलाण गांव में रविवार को ऐसा कुछ देखने को मिला। यहां पर करीब चार दशक के बाद देवता फलाणी नारायण के आदेश पर काहिका उत्सव का आयोजन किया गया।
काहिका उत्सव में देवता कतरूसी नारायण, गौहरी देवता, पंचाली नारायण सहित छह अन्य देवताओं के निशान भी पहुंचे। फलाण नारायण के मंदिर में रविवार सुबह ध्वजा को खड़ा किया। दोपहर बाद काहिका की प्रक्रिया आरंभ हुई। काहिका उत्सव में मूर्छित नड़ दैवीय शक्ति से सचेत हो उठा। इससे पहले देव विधि से नड़ को मूर्च्छित भी किया गया। इसे देखने के लिए घाटी के सैकड़ों लोग पहुंचे। वाद्य यंत्र ढोल, नगाड़े, करनाल, नरसिंगों की स्वरलहरियों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। देवताओं के गूरों ने देवखेल भी की। इस बीच काहिका में लोगों पर आटा भी फेंका गया। काहिका के दौरान सूखे आटे को आसमान की तरफ फेंकने की परंपरा है। देवता के कारदार देवीसुख ठाकुर ने कहा कि देव आदेश पर परंपरानुसार काहिका उत्सव पूरा किया गया है। इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने देवताओं के समक्ष शीश नवाया और आशीर्वाद प्राप्त किया। ग्राम पंचायत फलाण की प्रधान रेशमा देवी ने कहा कि मान्यता है कि देवता के काहिका उत्सव से क्षेत्र में सुख-शांति रहती है। हारियानों व देवलुओं ने भी देवताओं से दुख-दर्द दूर करने की प्रार्थना की।