संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले में एक तरफ विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर चार जंगल आग से दहकते रहे। इतना ही नहीं जंगल रात भर आग से जलते रहे।
कुल्लू जिले की थरास बीट, खोखन, लगवैली और हाथीथान के जंगल में लाखों की वन संपदा और जीव-जंतु भी आग की भेंट चढ़ गए। जंगल में लगी आग को तेजी से फैलता देखकर साथ लगते गांववासी भी सहम गए। जिले में रविवार को जिला प्रशासन और वन विभाग लोगों को पर्यावरण बचाने का संदेश देने तक सीमित नजर आए। आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग और अग्निशमन सजग नहीं दिखे। ऐसे में महिलाओं ने स्वयं मोर्चा संभाल कर सोमवार तक आग पर काबू पाने का प्रयास किया, जो लगभग तीन घंटे तक जारी रहा। इसमें पुरुषों ने भी सहयोग दिया।
बता दें कि भुंतर के साथ लगते खोखन बीट के जंगल में पिछले तीन दिनों से आग भड़कती रही। वन विभाग आग को बुझाने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास नहीं कर रहा है। आग तेजी से फैलती जा रही है। इसमें चीड़ के जंगल समेत अन्य वन संपदा राख के ढेर में तब्दील हो रही। हुरला की थरास बीट का जंगल पर्यावरण दिवस पर दोपहर बाद जलता रहा। यह आग धीरे-धीरे तेजी से गांव की ओर फैलती गई, जिसे लोगों ने बुझाने का प्रयास किया। इसके अलावा लगवैली के जंगल में भी आग लगी। महिलाओं ने पुरुषों के साथ मिलकर आग पर काबू पाया। हाथीथान के साथ लगता जंगल भी जलता रहा। उधर, वन विभाग कुल्लू के अरण्यपाल अनिल जोशी ने बताया कि जंगल में लगातार लग रही आग की घटनाओं का मामला ध्यान में है। थरास जंगल में लगी आग को बुझाने के लिए वनरक्षक पूरी रात लगे रहे। सोमवार सुबह भी विभिन्न टीमों ने संबंधित क्षेत्रों में जाकर आग पर काबू पाया। आग बुझाने में अग्निशमन और स्थानीय लोगों का सहयोग मिल रहा है।
पिछले एक माह में 15 से 20 बार जले जंगल
कुल्लू जिले में पिछले एक माह से विभिन्न जगहों पर 15 से 20 जंगल में आग लगने की घटनाएं सामने आई। वन विभाग की ओर से अलग-अलग टीमें बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में फायर वॉचर की तैनाती करने के बाद भी शरारती तत्वों का पता नहीं चल रहा है।