कुल्लू। गड़सा घाटी के देवता मार्कंडेय ऋषि के सम्मान में आयोजित थरास के तीन दिवसीय मेले से पूरी घाटी देवमय हो गई है। वीरवार को दूसरे दिन मेले में कुल्लवी नाटी और देव नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा।
मेले में गड़सा और हुरला सहित आसपास के इलाकों के लोग पहुंचे और देवता मार्कंडेय ऋषि थरास, बंजार घाटी के पेड़चा से आए देवता मार्कंडेय ऋषि तथा हुरला के वीरनाथ देवता के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान यहां तीनों देवताओं के देवलुओं ने पारंपरिक नाटी डाली। इस दौरान ढोल-नगाड़ों, नरसिंगों, करनाल और शहनाई की स्वरलहरियों के साथ देव नृत्य किया।
इसको देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। मेले में बंजार के देवता मार्कंडेय ऋषि सात साल बाद देवता मार्कंडेय थरास के बुलावे से आए हैं। टीसी महंत और रविंद्र रब्बू ने कहा कि शुक्रवार को मार्कंडेय ऋषि पेड़चा ब्यास किनारे मकराहड़ में शाही स्नान करेंगे। इसके बाद मकराहड़ में ही अपनी प्रकट स्थली को स्पर्श कर धरती मां का आशीर्वाद लेंगे। इस भावुक नजारे को देखने के लिए भारी संख्या में लोग भाग लेंगे। संवाद