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घर वापसी तक यूनिवर्सिटी की कैंटीन में खाना बनाएंगे भाई-बहन

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यूक्रेन में यूनिवर्सिटी की कैंटीन में खाना बनाते कुल्लू के छात्र। - फोटो : Kullu
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कुल्लू। यूक्रेन में रूस के तेज होते हमले के बीच फंसे विद्यार्थियों को अपने घर लौटने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। वहीं परिजन अपने बच्चों के घर आने के इंतजार में हैं। जिला कुल्लू से यूक्रेन में फंसे करीब एक दर्जन छात्र-छात्राओं में से तीन विद्यार्थी अपने घर पहुंच गए हैं। लेकिन कुल्लू के रहने वाले भाई- बहन अभी यूक्रेन के एक शहर में फंसे हैं। वे अब यूनिवर्सिटी की कैंटीन में खाना बनाएंगे। यूनिवर्सिटी की कैंटीन में जहां वे सुरक्षित रहेंगे, वहीं कैंटीन में कुक की भी मदद होगी।
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बताया जा रहा है कि रूस के हमले के कारण यूनिवर्सिटी की कैंटीन से दो कुक भाग गए हैं और अब हजारों विद्यार्थियों को खाना बनाने के लिए एकमात्र कुक ही बचा है। ऐसे में कुल्लू के भाई-बहन हंगरी के बॉर्डर पहुंचने तक कुकिंग में मदद करेंगे। वहीं वैभवी और विदित गौतम ने पिता विवेक गौतम के कहने पर कैंटीन कुक को आर्थिक मदद भी की है। विवेक गौतम ने कहा कि उनके बच्चों का अभी बॉर्डर के लिए नंबर नहीं आया है। ऐसे में उन्होंने दोनों बच्चों को तब तक सुरक्षा की दृष्टि से कैंटीन में खाना बनाने में मदद करने के लिए कहा है। इस दौरान शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर ने भाई-बहन के परिजनों को फोन कर हालचाल जाना है। उन्होंने मामले को मुख्यमंत्री के ध्यान में लाने का भी आश्वासन दिया।
वहीं, जिला कुल्लू के अभी भी करीब आधा दर्जन छात्र कई जगहों पर फंसे हुए हैं। इस बीच कुल्लू की वंशिता धीमान रोमानिया से भारत के लिए रवाना हो गई हैं और रविवार शाम को हवाई जहाज दिल्ली में उतरा है। जबकि मनाली की शुभदर्शनी भी यूक्रेन से हंगरी के बॉर्डर पर बस से पहुंचीं। उनके पिता भूप सिंह ने कहा कि बेटी हंगरी पहुंच गई है और अब घर आने का बेसब्री से इंतजार है। इसके अलावा भुंतर के यूक्रेन में फंसे बच्चों को अभिभावकों की परेशानी बढ़ गई है। उन्होंने भारत सरकार से विद्यार्थियों को जल्द निकालने की अपील की है।
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