देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान (डीम्ड यूनिवर्सिटी) से विगत कुछ समय पहले बने संस्कृत विश्वविद्यालय के अनुबंध और गेस्ट टीचर इस वर्ष पुनर्नियुक्ति न मिलने के कारण आर्थिक समस्या से जूझ रहे हैं। परागपुर और साथ लगते क्षेत्रों में किराये के मकानों में रह रहे ये अस्थायी प्राध्यापक किराया तक देने में असमर्थ हो चुके हैं। इस वजह से दूसरे राज्यों से यहां आए ये प्राध्यापक घर वापसी को मजबूर हैं।
संस्कृत विश्वविद्यालय वेदव्यास परिसर के करीब 10 अस्थायी प्राध्यापक इन दिनों आर्थिक तंगी के कारण अपने घरों को रवाना होने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं जो स्थानीय हैं, वह भी ज्वाइनिंग न मिलने के कारण आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। यही नहीं, पिछले करीब तीन माह से विवि की ऑनलाइन कक्षाएं भी प्रभावित हो रही हैं। लेकिन हर बार विवि में वीसी न होने का कारण बताकर इन अस्थायी प्राध्यापकों को टाल दिया जाता है।
जानकारी के अनुसार 12 अगस्त से दूसरे, चौथे और छठे सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। कंप्यूटर प्राध्यापक अमित वालिया, अमर चंद, अंग्रेजी विषय के मनीष कुमार और विभिन्न अन्य विषयों के पुरुषोत्तम कुमार, मुकेश शर्मा, कुमारी मनोज्ञा, राजन मिश्र, भूपेंद्र ओझा, ओंकार चंद डोगरा, पीयूष त्रिपाठी और प्रदीप शर्मा आदि ने बताया कि ऐसा नहीं है कि परिसर के निदेशक और दिल्ली स्थित मुख्यालय के अधिकारियों को इस बात की जानकारी नहीं है। सभी इस समस्या से भलीभांति परिचित हैं, लेकिन वीसी न होने का हवाला देकर इनकी नियुक्ति नहीं दी जा रही है। इस कारण संस्कृत विवि के बलाहर स्थित वेदव्यास परिसर के करीब 10 अस्थायी प्राध्यापकों सहित देशभर के कुल 171 अस्थायी प्राध्यापक इन दिनों परेशानी से जूझ रहे हैं।
गौरतलब है कि 14 जून को पुराने वीसी की रिटायरमेंट के बाद अब तक संस्कृत का यह विवि जिसके देश भर में कुल 12 परिसर हैं और दिल्ली में इसका मुख्यालय है, बिना वीसी के ही चल रहा है। अस्थायी प्राध्यापकों ने मांग की है कि उन्हें तुरंत पुनर्नियुक्ति दी जाए।