धर्मशाला/पालमपुर (कांगड़ा)। राष्ट्रीकृत बैंकों के कर्मचारियों की दो दिवसीय हड़ताल के पहले ही दिन वीरवार को करोड़ों का लेनदेन प्रभावित हुआ। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से क्लीयरेंस हाउस बंद रहे। इसके चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
पैसे निकालने के लिए या भेजने के लिए लोगों को निजी बैंक के साथ एटीएम का रुख करना पड़ा। देश में सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों की निजीकरण की प्रस्तावित नीति को लेकर बैंक कर्मचारियों ने नाराजगी जाहिर की। देशभर के 10 लाख बैंक कर्मी दो दिन की हड़ताल पर हैं तथा बैंकों में तालाबंदी है। धर्मशाला में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के बैनर तले पब्लिक सेक्टर के बैंकों के निजीकरण के विरोध में वीरवार को जिला कांगड़ा में भी राष्ट्रीयकृत बैंकों में हड़ताल रही। पीएनबी स्टाफ यूनियन हिमाचल प्रदेश के महासचिव राजकुमार गौतम ने बताया कि सरकार पब्लिक सेक्टर के बैंकों के निजीकरण के लिए केंद्र सरकार बैंकिंग लॉ अमेंडमेंट बिल 2021 को संसद में पास करवाना चाहती है। लेकिन बैंकिंग इंडस्ट्री की 2 दिन की हड़ताल के चलते सरकार ने इस बिल को स्थगित कर दिया है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पब्लिक सेक्टर बैंकों को निजी हाथों में सौंपना चाहती है। यदि ऐसा होता है तो पब्लिक सेक्टर के बैंकों में जमा गरीब जनता का 157 लाख करोड़ रुपया निजी हाथों में चला जाएगा। उन्होंने कहा कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन की दो दिवसीय हड़ताल के बावजूद सरकार नहीं जागती है तो एक सप्ताह की हड़ताल से भी यूनियन पीछे नहीं हटेगी।
जिला कांगड़ा के लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर कुलदीप कौशल ने बताया कि वीरवार को कांगड़ा में राष्ट्रीकृत बैंक के 83 प्रतिशत कर्मचारियों के हड़ताल और छुट्टी पर रहने से बैंकों में काम का पूर्ण रूप से बंद रहा है। इसके चलते लोगों को करोड़ों रुपये को लेनेदेन प्रभावित हुआ है। वहीं बैंकों में चेक क्लीयरेंस हाउस भी पूरी तरह से बंद रहे हैं। हालांकि एटीएम में लोगों की सुविधा के लिए कैश की कमी नहीं आने दी है।