धर्मशाला। नगर निगम धर्मशाला की मंगलवार को हुई बैठक में मुख्यमंत्री शहरी आजीविका गारंटी योजना के तहत दिहाड़ीदारों को समय पर पैसे न देने और कई दिहाड़ीदारों की दिहाड़ियां काट लेने का मामला खूब गर्माया।
दिहाड़ीदारों के साथ हो रहे अन्याय के मुद्दे को ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता के साथ उठाया था। बैठक में जैसे ही मुख्यमंत्री शहरी आजीविका गारंटी योजना पर चर्चा शुरू हुई, तो सभी पार्षदों ने अधिकारियों के लापरवाह रवैैये के लिए निशाने पर ले लिया। डिप्टी मेयर सर्वचंद गलोटिया तो बाकायदा 23 लोगों की सूची बैंक खाता संख्या के साथ बनाकर लाए थे।
इस दौरान मेयर ओंकार नैहरिया, पूर्व मेयर देवेंद्र जग्गी, रजनी ब्यास, पार्षद सविता कार्की और सुषमा ने अधिकारियों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि शहर के जरूरतमंद लोगों को रोजगार दिया गया था। इसमें 60-70 वर्ष की बुजुर्ग महिलाओं ने भी काम किया। अब यही बुजुर्ग औरतें अपनी दिहाड़ी के पैसे लेने के लिए 15-15 बार पासबुक की प्रति कार्यालय में जमा करवा चुकी हैं। ऐसा लगता है कि नगर निगम के अधिकारियों में काम करने का उत्साह ही नहीं बचा है। उन्होंने इन अधिकारियों को दिल लगाकर अपना काम करने की नसीहत दी। सभी पार्षदों ने एक स्वर में नगर निगम अधिकारियों को समय पर सभी दिहाड़ियों के पैसे कामगारों के बैंक खाते में डलवाने को कहा है। गौरतलब है कि नगर निगम धर्मशाला ने पिछले साल दिसंबर से लेकर मार्च तक रोजगार के नाम पर गरीबों से जो दिहाड़ी लगवाई थी, उसमें करीब 70 दिहाड़ीदारों की दिहाड़ी के पैसे लटका दिए थे। दफ्तर के कई चक्कर काटने के बाद अब कई दिहाड़ीदारों के पैसे उनके खाते में आ गए, जबकि अभी भी बाकी लोगों को पैसे मिलने का इंतजार है। वहीं, दिहाड़ी लगाने वाले लोगों की दिहाड़ी ही कंप्यूटर के रिकॉर्ड में नहीं चढ़ाई गई है। ऐसे में दिहाड़ीदारों की करीब पांच से लेकर 20 दिन की दिहाड़ियों के पैसे काट लिए गए हैं।