धर्मशाला। एक तरफ प्रदेश सरकार सूबे में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के दावे कर रही है, लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही है। प्रदेश के दूसरे बड़े टांडा मेडिकल कॉलेज पर कांगड़ा समेत चार जिलों के मरीज निर्भर रहते हैं, लेकिन यहां पर सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को आईजीएमसी शिमला या पीजीआई चंडीगढ़ के अलावा निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा रहा है।
इस समय टांडा मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी वार्ड में हार्ट के चार डॉक्टर मौजूद हैं, लेकिन वहां पर टेक्निकल स्टाफ न होने के कारण अस्पताल में दिल के मरीजों के ऑपरेशन तक नहीं हो पा रहे हैं। साथ ही वहां पर उपकरणों की कमी के कारण भी मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हार्ट अटैक या स्टंट डलवाने के लिए दिल के मरीजों को शिमला, चंडीगढ़ या निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। साथ ही मरीजों की जान को भी जोखिम में डालना पड़ रहा है। प्रदेश के दूसरे बड़े मेडिकल कॉलेज में इस तरह की असुविधाएं चार जिलों के लाखों लोगों पर भारी पड़ रही हैं।
अस्पताल प्रशासन ने इस समस्या के बारे में स्थानीय विधायक और प्रदेश सरकार को पत्र भी लिखा है और जल्द टेक्निकल स्टाफ भरने की मांग की है। मगर अभी तक प्रदेश सरकार की ओर से इस गंभीर समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। टेक्निकल स्टाफ न होने के कारण दिल के मरीजों के किसी भी प्रकार के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं।
कोट
-टांडा मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी वार्ड में टेक्निकल स्टाफ को जल्द भरने के लिए प्रदेश सरकार को पत्र भेजा गया है। इस बारे में विधायक अरुण कुमार कूका को भी अवगत करवाया है। जैसे ही सरकार अस्पताल में इस स्टाफ के कर्मियों की तैनाती कर देगी तो उसके बाद व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चल पड़ेंगी। - डॉ मोहन, एमएस, टांडा मेडिकल कॉलेज