इसके लिए कृषि विवि पालमपुर विदेश और देश में सबसे उपयुक्त रहेगा। इस सेमिनार में इस बात पर भी जोर दिया गया कि गेहूं की फसल में लगने वाले झुलसा रोग के लिए भारत-बांग्लादेश की सीमाओं पर इसके लिए विशेष निगरानी रखी जाएगी। इसमें पाया गया कि गेहूं की फसल में लगने वाला झुलसा रोग भारत में बांग्लादेश की सीमा से प्रवेश करता है।
जलवायु के प्रभावों को कम करके जिंक तथा लौह तत्वों से भरपूर कम समय में तैयार होने वाली गेहूं की किस्मों को लेकर कृषि विवि में अंतरराष्ट्रीय स्तर का केंद्र खोलकर इस पर शोध होने चाहिए। गेहूं उत्पादकता बढ़ाने के लिए यह भी फैसला लिया गया कि देश में इसके लिए अधिक क्षेत्रफल भी तैयार किया जाएगा।
तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में गेहूं की नई किस्म के शोध के अलावा अंतरराष्ट्रीय गेहूं केंद्र खोलने पर चर्चा हुई। इसके लिए सेमिनार में शामिल सात देशों के कृषि वैज्ञानिक एकमत रहे।-डॉ. हृदय पाल सिंह, संयुक्त निदेशक, कृषि विवि पालमपुर
चौधरी सरवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में गेहूं पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का समापन हो गया। समापन समारोह में गेहूं के शोध पर सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियां देने वालों को सम्मानित किया गया।
मुख्यातिथि कुलपति प्रो. अशोक कुमार सरयाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम कर गेहूं की उपज को बढ़ाना समय की मांग है। कहा कि विश्व के उच्च कोटि के वैज्ञानिकों की ओर से गेहूं पर अब तक हुए अनुसंधान के निष्कर्षों पर चर्चा से वैज्ञानिक तथा स्नातकोत्तर छात्र अवश्य लाभान्वित होंगे।
नाबार्ड बैंक के मुख्य महाप्रबंधक रणवीर सिंह ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने से भविष्य के शोध के लिए दिशा मिल जाती है। यूनाइटेड किंग्डम स्थित नॉटिंघम यूनिवर्सिटी से आए वैज्ञानिक डा. ईयान किंग, आयोजन सचिव डॉ. एचके चौधरी ने भी विचार रखे। कुलपति प्रो. अशोक कुमार
सरयाल ने गेहूं के शोध पर सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियों के लिए विभिन्न संस्थानों के विजेताओं भावना (हिसार), डॉ. पूनम जसरोटिया (करनाल), डॉ. अमित गौतम (मोरक्को), डॉ. गौरव (पालमपुर), डॉ. स्नेह नरवाल (करनाल) तथा डॉ. भूमेश (करनाल) को बेस्ट पेपर अवार्ड से सम्मानित किया।