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मटौर-ज्वालाजी फोरलेन प्रभावितों को तीन माह से नहीं मिली भू अधिग्रहण की राशि

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ज्वालामुखी (कांगड़ा)। शिमला-मटौर फोरलेन परियोजना के पांचवें चरण के मटौर से ज्वालाजी फोरलेन को अवार्ड किए करीब तीन महीने होने को हैं, लेकिन अभी तक देहरा और ज्वालाजी क्षेत्र के फोरलेन प्रभावितों के खाते में उनकी भू-अधिग्रहण की राशि नहीं डाली गई है। इससे यहां के स्थानीय लोग असमंजस में हैं।
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लोगों का सवाल है कि सरकार इतना समय क्यों ले रही है, जबकि सरकार ने इन प्रोजेक्टों को बहुत ही गलत ढंग से हैंडल किया है और जनता के लिए हर रोज नई समस्याएं पैदा करने के सिवाय दूसरा कोई काम नहीं किया।
एक ही पैकेज के जहां आधे लोगों के अवार्ड कर दिए गए हैं, वहीं दूसरी तहसील ज्वालाजी के लोग अभी अपने अवार्ड अनाउंसमेंट की घोषणा होने का इंतजार कर रहे हैं। इस विषय पर हिमाचल मानवाधिकार लोक बॉडी के अध्यक्ष राजेश पठानिया ने जब एसडीएम देहरा से संपर्क किया, तो उन्होंने बताया कि उनकी ओर से सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और एनएचएआई हमीरपुर को भेज दी हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक भू-अधिग्रहण की राशि नहीं भेजी है।
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प्रोजेक्ट डायरेक्टर हमीरपुर और डीसी हमीरपुर से भी इस मुद्दे को लेकर लोगों की ओर से संपर्क किया गया, लेकिन अभी कोई राहत नहीं मिली है। ज्वालामुखी तहसील क्षेत्र में फोरलेन से प्रभावितों राणा रंजीत सिंह, राणा विजय सिंह, राणा गुरदेव सिंह, राणा गुरबचन सिंह,अजय राणा, नागेश राणा, राणा करण सिंह, माणिक राणा, शुभम राणा, डॉक्टर वकील चांद, केवल कृष्ण, जोगिंदर सूद, राजेंद्र ठाकुर, जनक धनोटिया, राकेश ठाकुर, ज्ञानचंद, मेला राम, ज्ञानू चांद, जगदीश चंद, सीताराम, बलविंदर ठाकुर, साहिल राणा, सुरजीत सिंह, बर्फी देवी, अनीश वेद आदि का कहना है कि एक तो सरकार ने उनकी जमीनों के दाम कोड़ियों में लगाकर और एनएच को लिंक रोड दर्शाकर उनके साथ अन्याय किया है, इससे सभी प्रभावित लोग बहुत आहत हैं। इस प्रोजेक्ट को शुरू हुए छह साल का लंबा अरसा बीत चुका है और हर बार यह कह कर टाल दिया जाता है कि एक या दो महीने में यह काम शुरू हो जाएगा। ज्वालाजी और देहरा के प्रभावितों ने जिला प्रशासन और सरकार से मांग की है कि इस कार्य को जल्द से जल्द किया जाए। अन्यथा सभी प्रभावित और हिमाचल मानव अधिकार बॉडी आंदोलन का रास्ता अपनाएगी और इसकी सारी जिम्मेदारी एनएचएआई और प्रदेश सरकार की होगी।
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