पालमपुर (कांगड़ा)। कुष्ठ रोग किसी पाप या दैवीय प्रकोप का परिणाम नहीं, बल्कि एक सामान्य जीवाणुजनित बीमारी है। सही समय पर उपचार और समाज की सकारात्मक सोच से इसे पूरी तरह खत्म किया जा सकता है। यह बात जोनल लेप्रोसी अधिकारी डॉ. निशांत मेहता ने विश्व कुष्ठ रोग दिवस के अवसर पर कंडवारी अस्पताल में आयोजित विशेष जागरूकता शिविर में कही।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भेदभाव और अंधविश्वास ही इस बीमारी के उपचार में सबसे बड़ी बाधा हैं। शिविर में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कंडवारी के 100 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. निशांत ने रोग के लक्षण, संक्रमण और रोकथाम की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोग लाइलाज नहीं है और मुफ्त चिकित्सा सुविधाओं के माध्यम से रोगी जल्द ही सामान्य जीवन में लौट सकता है।
कार्यक्रम के मुख्यातिथि सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक (स्वास्थ्य) डॉ. नरेश कुमार ने भी स्वास्थ्य शिक्षा के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सही जानकारी और जागरूकता से ही समाज में फैले डर, अंधविश्वास और भेदभाव को समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने परिवार और समाज में कुष्ठ रोग के प्रति सकारात्मक तथा सही संदेश फैलाने का आह्वान किया।
बापू को श्रद्धांजलि और उन्मूलन का संकल्प
महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित सदस्यों ने कुष्ठ रोग के उन्मूलन और रोगियों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण व भेदभाव-रहित व्यवहार करने की सामूहिक शपथ ली। एएलओ सुधीर, फार्मासिस्ट रणबीर और अस्पताल स्टाफ ने सफल आयोजन के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।