वायनाड प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले कांगड़ा के इंजीनियर विक्रम राणा का सोमवार को पैतृक गांव टकोली घिरथा में अंतिम संस्कार किया गया। छह दिन के सर्च ऑपरेशन के बाद उनका शव बरामद हुआ था। बेटे हिमांशु ने उन्हें मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की।
रैहन (कांगड़ा)। केरलम के वायनाड में हुई प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले फतेहपुर उपमंडल की टकोली घिरथा पंचायत के निवासी इंजीनियर विक्रम राणा का सोमवार को उनके पैतृक गांव में रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने भाग लेकर उन्हें नम आंखों से विदाई दी। मृतक के पुत्र हिमांशु ने उन्हें मुखाग्नि दी।
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इंजीनियर विक्रम राणा (50) पुत्र रंजीत सिंह सात जुलाई को वायनाड में आई त्रासदी के दौरान लापता हो गए थे। केरल सरकार और राहत व बचाव दलों द्वारा छह दिनों तक चलाए गए गहन सर्च ऑपरेशन के बाद उनका शव बरामद हुआ था। सोमवार को उनका पार्थिव शरीर वायु मार्ग से अमृतसर एयरपोर्ट पहुंचाया गया, जहां से सड़क मार्ग के जरिए दोपहर करीब एक बजे उनके पैतृक गांव लाया गया।
शव के घर पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था और पूरा माहौल गमगीन हो उठा। ग्रामीणों ने विक्रम राणा को एक मिलनसार व मेहनती व्यक्ति बताते हुए उनके निधन को क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
केरल के वायनाड में हुई भीषण त्रासदी में जान गंवाने वाले फतेहपुर उपमंडल की पंचायत टकोली घिरथा के