शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी मंदिर में हुई गंभीर घटना के बाद अब मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। श्रद्धालु के खुद को आग लगाने और बाद में उपचार के दौरान उसकी मौत होने की घटना ने मंदिर परिसर में प्रवेश की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर नए सिरे से समीक्षा की जरूरत पैदा कर दी है।
घटना के बाद मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा शुरू कर दी है। मंदिर अधिकारी अजय मंडयाल ने सुरक्षा इंचार्ज को कारण बताओ नोटिस जारी कर घटना के संबंध में जवाब मांगा है। उनसे यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि मंदिर परिसर में इतनी गंभीर घटना किन परिस्थितियों में हुई और सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद समय रहते इसे क्यों नहीं रोका जा सका।
बैग और पानी की बोतल पर लग सकती है रोक
सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए मंदिर प्रशासन अब श्रद्धालुओं के सामान को लेकर भी बदलाव की तैयारी में है। प्रस्ताव के तहत श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर के भीतर बैग, पानी की बोतल और अन्य सामान ले जाने की अनुमति नहीं देने पर विचार किया जा रहा है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो श्रद्धालुओं को अपना सामान उसी स्थान पर रखना होगा, जहां वे मंदिर में प्रवेश से पहले जूते-चप्पल उतारते हैं। हालांकि, यह व्यवस्था अभी अंतिम रूप से लागू नहीं हुई है। मंदिर न्यास की आगामी बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद ही इस संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
प्रवेश और निकासी मार्गों पर बढ़ेगी सुरक्षा
मंदिर प्रशासन अब केवल सामान की निगरानी तक सीमित नहीं रहना चाहता। मंदिर के अन्य प्रवेश और निकासी मार्गों पर भी अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। प्रशासन का जोर मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं पर नजर रखने, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने और किसी भी असामान्य स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने पर रहेगा। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारियों के बीच भी चर्चा हुई है। मंदिर अधिकारी ने एसडीएम ज्वालामुखी डॉ. संजीव शर्मा के साथ सुरक्षा इंतजामों को लेकर विचार-विमर्श किया है।
श्रद्धालु की टांडा में हुई मौत
यह पूरा मामला 17 सितंबर की शाम सामने आया था। मंदिर परिसर में एक राजस्थान निवासी श्रद्धालु ने खुद को आग लगा ली थी। घटना गर्भगृह के बाहर पीपल के पास हुई थी। आग की चपेट में आने से श्रद्धालु करीब 60 प्रतिशत झुलस गया था।
मंदिर प्रशासन और सुरक्षा कर्मचारियों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर आग बुझाने और श्रद्धालु को बचाने का प्रयास किया। उसे पहले ज्वालामुखी अस्पताल पहुंचाया गया। हालत गंभीर होने के कारण वहां से टांडा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया गया था। उपचार के दौरान 18 सितंबर को उसकी मौत हो गई। पुलिस घटना के कारणों की जांच कर रही है।