धर्मशाला। दशकों से देहरा कोई नहीं तेरा का तंज सहने वाले हलके में जयराम गुट ने धूमल गुट को झटका दे दिया है। भाजपा के सूत्रों की मानें तो देहरा से निर्दलीय विधायक होशियार सिंह को भाजपा में शामिल करवाने की पटकथा कई महीने पहले से लिखी जा रही थी। जयराम गुट सही मौके की तलाश में था। चुनावी वर्ष में हमीरपुर में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद इस मौके को भुनाया गया। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बिगुल बजाने वाले होशियार सिंह अब भाजपा की आंखों का तारा बन गए हैं।
दरअसल, 2017 के विस चुनाव में देहरा से भाजपा की टिकट पर रविंद्र रवि ने चुनाव लड़ा था। उन्हे मुंबई से आए निर्दलीय प्रत्याशी होशियार सिंह ने हराया था। रविंद्र रवि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूंमल के बेहद करीबी लोगों में गिने जाते हैं। पिछला विस चुनाव हारने के बाद से रविंद्र रवि को धीरे- धीरे शीर्ष नेतृत्व ने हाशिये पर लाना शुरू कर दिया था। मुख्यमंत्री बनने के बाद अपनी टीम बनाने के लिए जयराम ठाकुर ने भी रविंद्र रवि के बजाय निर्दलीय विधायक होशियार सिंह को तवज्जो देना शुरू कर दी थी। होशियार सिंह ने धूमल गुट के खिलाफ कई बार सार्वजनिक रूप से हमला बोला, लेकिन उन्हें सरकार में तवज्जो मिलती रही। राजनीतिक पंडितों की मानें को धूमल गुट को कमजोर करने के लिए देहरा में यह सियासी पासा फेंका गया है।
होशियार सिंह के भाजपा में शामिल होने के बाद रविंद्र रवि की टिकट खतरे में पड़ गई है। सूत्रों की मानें तो भाजपा की टिकट की शर्त पर ही होशियार सिंह ने पार्टी में खुद को शामिल किया है। अब सवाल उठता है कि अगर होशियार सिंह को देहरा से भाजपा की टिकट मिली तो लगातार पांच चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाने वाले रविंद्र रवि को चुनाव लड़ाया जाएगा या नहीं। उधर, होशियार सिंह के भाजपा में शामिल होने के बाद ज्वालाजी से विधायक रमेश धवाला के देहरा से लड़ने की संभावनाओं पर भी विराम लगता दिख रहा है। राजनीतिक पंडित मान रहे हैं कि कांगड़ा की सियासी फिजा इस बार जयराम बनाम धूमल गुट में तब्दील होती दिखने लगी है। आने वाले समय में अब सियासत और गर्माने के आसार बन गए हैं।