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स्कूल फिर से बंद न हों, इसलिए जरूरी है बच्चों का वैक्सीनेशन

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धर्मशाला। कोरोना महामारी में लॉकडाउन के चलते स्कूलों में पढ़ाई करीब दो वर्ष तक बुरी तरह से बाधित हुई है। अब हालात कुछ सामान्य होने के बाद एक बार फिर से कक्षाएं ऑफलाइन शुरू हो सकी हैं। कोरोना महामारी में ऑनलाइन कक्षाओं ने पढ़ाई का एक विकल्प तो उपलब्ध करवा दिया, मगर इसके शारीरिक और मानसिक सेहत पर कई बुरे असर देखने को मिले।
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ऑनलाइन कक्षाओं के इन बुरे अनुभवों को ध्यान में रखते हुए अब कोई भी अभिभावक नहीं चाहता कि ऑफलाइन कक्षाएं फिर से बंद हों। इस लिहाज से स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी 5 से 12 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए कोरोना वैक्सीनेशन शुरू हो पाता है, तो अभिभावक अफवाहों पर ध्यान दिए बगैर बच्चों को वैक्सीन दिलवाकर उन्हें सुरक्षा कवच जरूर प्रदान करें।
बेफिक्र होकर बच्चों को दिलवाएं वैक्सीन: डॉ. शैली
खंड चिकित्सा अधिकारी फतेहपुर डॉ. शैली शर्मा ने बताया कि तीसरी लहर में कोरोना महामारी से ज्यादातर बच्चे ही संक्रमण से प्रभावित हुए थे। ऐसे में बच्चों के लिए कोविड वैक्सीनेशन बहुत जरूरी है। केंद्र सरकार ने अच्छे से अध्ययन करने के बाद ही बच्चों के लिए सबसे बाद में वैक्सीनेशन शुरू किया है। ऐसे में बेफिक्र होकर बच्चों को वैक्सीन दिलवाएं।
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कक्षाएं चलाने को जरूरी है बच्चों का वैक्सीनेशन: डॉ. पवन
बीएमओ ज्वालामुखी डॉ. पवन शर्मा ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण स्कूली बच्चों की लंबे समय के बाद ऑफलाइन कक्षाएं शुरू हो सकी हैं। इन्हें लगातार चलाए रखने के लिए जरूरी है कि बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाकर इन्हें कोरोना संक्रमण से बचाया जाए। ऐसे में बच्चों के कोविड से बचाव को वैक्सीनेशन बेहद जरूरी है।
कमजोर इम्युनिटी के कारण बच्चों को टीका जरूरी: डॉ. उदय
धर्मशाला अस्पताल के डॉ. उदय ने बताया कि अब तक के अध्ययनों से यही बात निकलकर सामने आई है कि बच्चों में इम्यूनिटी बड़ों के मुकाबले कमजोर होती है। बड़ों ने वैक्सीन लेकर इम्यूनिटी को और अधिक मजबूत कर लिया है। ऐसे में यदि चौथी लहर दस्तक देती है, तो इसका सबसे ज्यादा खतरा बच्चों पर ही होगा। इसलिए बच्चों को वैक्सीनेशन अभियान में जरूर शामिल करें।
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