If the employees form the government
नगरोटा बगवां (कांगड़ा)। पेंशनरों ने कहा है कि प्रदेश सरकार इस वर्ग को नजरअंदाज न करे। कर्मचारी और पूर्व कर्मचारी यदि सरकार बनाने में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं तो सरकार गिराने में भी सक्षम हैं।
नगरोटा बगवां में भारतीय राज्य पेंशनर महासंघ हिमाचल प्रदेश के राज्य स्तरीय सम्मेलन में इस वर्ग की लंबित मांगों को न मानने से नाराज अधिकतर वक्ताओं ने प्रदेश सरकार को आड़े हाथ लिया। पदाधिकारी वक्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया था कि पेंशनरों की मांगों को नजरअंदाज न करें, लेकिन इस बात का ख्याल नहीं किया गया। वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि सरकार को अंधविश्वास हो गया है कि वे रिपीट करेंगे, लेकिन बिना कर्मचारियों के योगदान के सरकार बनाना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि मिशन रिपीट जरूर होता है, लेकिन वह कल्याणकारी सरकार का होता है। वक्ताओं ने कहा कि पूर्व कर्मचारी कल्याण बोर्ड का यदि गठन कर दिया होता तो इस वर्ग की आधी से अधिक समस्याओं का समाधान स्वत: हो जाता। वक्ताओं ने रोष व्यक्त किया कि समाधान करना तो अलग बात, हमें वार्ता तक के लिए नहीं बुलाया गया। उन्होंने कहा कि जीवन के इस पड़ाव में इस वर्ग की दुर्दशा हो रही है और हमें हक पाने को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। उन्होंने विधायक अरुण कुमार मेहरा के माध्यम से सीएम को संदेश भेज कर इस वर्ग का कल्याण करने को कहा। इस मौके पर परिवहन निगम सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याण मंच के प्रदेशाध्यक्ष बलराम पुरी ने निगम के पेंशनरों को समय पर पेंशन न मिलने और लंबित आर्थिक लाभों को शीघ्र प्रदान करने को आवाज उठाई, जबकि परिवहन निगम राज्य कर्मचारी समस्या समाधान मंच के प्रदेश अध्यक्ष अशोक पुरोहित ने लंबित मांगों को लेकर नौकरशाही को घेरा। हालांकि सम्मेलन में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष घनश्याम शर्मा ने विभिन्न तर्कों से पेंशनरों की सरकार के प्रति नाराजगी को ढांपने का प्रयास किया। इस मौके पर महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष ब्रह्मानंद, इंद्रपाल शर्मा, डॉ. डीके सोनी, रमेश भंडारी, सुभाष पठानिया, आरके धीमान, पेंशनर फेडरेशन अध्यक्ष हिम्मत सिंह, अखिल भारतीय पेंशनर संघ के प्रदेश अध्यक्ष सरनदास, शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष यशवंत राणा, डॉ. केसी कंवर, सुरिंदर चौधरी और अन्य पदाधिकारी मंच पर उपस्थित थे।