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जीवन की स्वीकृति का दूसरा नाम ही परमात्मा : अतुल कृष्ण

Thu, 10 Apr 2025 12:35 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
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रक्कड़ (कांगड़ा)। जीवन की स्वीकृति का दूसरा नाम ही परमात्मा है। जीवन का विरोध करके परमात्मा को नहीं पाया जा सकता। गलत धारणा के कारण ही प्रतिभाशाली और बुद्धिमान लोग धर्म से दूर हटते चले गए। गलत लोग जिस जगह इकट्ठे हो जाएं वहां से ठीक लोग अपने आप हट जाते हैं। अर्थशास्त्र का एक नियम है कि खोटे सिक्के असली सिक्कों को चलन से बाहर कर देते हैं।
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यह अमृतवचन श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन अतुल कृष्ण महाराज ने चौली में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हम अपने आलसीपन को स्वीकार नहीं करते, क्योंकि उसे स्वीकार करने में हमारे अहंकार को चोट लगती है। प्रमादी व्यक्ति अपनी हर असफलता का ठीकरा काल, कर्म एवं ईश्वर पर फोड़ता है। उन्होंने कहा कि आज स्वस्थ लोगों ने धर्म के प्रति रुचि खो दी है। स्वस्थ लोग सोचने लगे हैं कि धर्म हमारे लिए नहीं है। धर्म की प्रतीति से जीवन नई ऊंचाइयों पर जा सकता था, पर ऐसा न हुआ। बुधवार को कथा में अजामिल का प्रसंग, अठाइस प्रकार के नरकों का वर्णन, प्रहलाद की भक्ति एवं श्रीनृसिंह भगवान का चरित्र लोगों ने तन्मय होकर सुना।
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