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जिला भर में स्वास्थ्य विभाग में तैनात अनुबंध कर्मचारियों ने की पेन डाउन हड़ताल

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भवारना में सांकेतिक हड़ताल करते हुए एनएचएम कर्मचारी - फोटो : Kangra
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धर्मशाला। अनुबंध कर्मचारी कार्यकारिणी जिला कांगड़ा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने बुधवार को राज्य स्वास्थ्य समिति अनुबंध कर्मचारी के आह्वान पर जोनल अस्पताल धर्मशाला में पेन डाउन हड़ताल की और सरकार के प्रति रोष प्रकट किया।
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बुधवार को सुबह 10 बजे से ही एनएचएम कर्मचारियों ने पेन डाउन मूवमेंट के दौरान काले बिल्ले लगाकर रोष जताया।
अनुबंध कर्मचारी जिला कार्यकारिणी महासचिव बक्शीश सिंह ने बताया कि एनएचएम के तहत विभिन्न 28 कैटेगरीज में अनुबंध पदों पर कर्मचारी पिछले 25 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज तक इन अनुबंध कर्मचारियों को रेगुलर करने को लेकर सरकार ने कोई भी नीति नहीं बनाई गई है। इससे इनका भविष्य पूर्णतया असुरक्षित है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जल्द स्वास्थ्य विभाग में एनएचएम के तहत कार्य कर रहे कर्मियों के लिए नीति बनाई जाए। इसके अलावा बुधवार को स्वास्थ्य खंड तियारा में कार्यरत कर्मचारियों ने काले बिल्ले लगाकर सरकार के प्रति रोष प्रकट किया।
शाहपुर में सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
शाहपुर (कांगड़ा)। सिविल अस्पताल शाहपुर में अपनी मांगों को लेकर नेशनल हेल्थ मिशन एसोसिएशन ब्लॉक शाहपुर के कर्मचारियों ने एक दिवसीय कलम छोड़ हड़ताल की। इस मौके पर कर्मियों ने राज्य और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन भी किया। इस मौके पर एसोसिएशन के प्रधान डॉ. विशाल पठानिया ने कहा कि लंबे समय से प्रदेश सरकार उनकी मांगों को पूरा करने में आनाकानी कर रही है। हमारी प्रमुख मांगें कर्मियों को रेगुलर करने और रेगुलर पे स्केल लागू करना है। अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया तो वे अपनी लड़ाई को ओर आगे लेकर जाएंगे, इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी। इस मौके पर डॉ. विशाल पठानिया, प्रियंका, सुखवंत सिंह, डॉ. शिवानी, डॉ. डोलिमा, डॉ. अमिता रानी, डॉ. अतुल शर्मा, डॉ. अभिनव शर्मा, विनीत, कुशा, सविता जामवाल, रितु वालिया, अंकुश, अल्पना सैनी आदि मौजूद थे।
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पॉलिसी बनाने की उठाई मांग
ठाकुरद्वारा (कांगड़ा)। सिविल अस्पताल इंदौरा में रोष प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों के अध्यक्ष डॉ. आशुतोष ने बताया कि लंबे अरसे से वे सरकार से नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चिकित्सक, फार्मासिस्ट, नर्सिंग वर्ग, बीपीएम, क्षयरोग संयोजक सहित 20-30 साल तक विभिन्न सेवाएं प्रदान कर कर्मचारी सेवा निवृत्त हो रहे हैं, लेकिन न तो उन्हें नियमित करने पर विचार किया गया और न ही नियमित पे स्केल के लिए कोई पॉलिसी बनाई गई। उन्होंने कहा कि सरकार जब तक कोई पॉलिसी नहीं बनाती, तब तक उनका यह काम छोड़ो आंदोलन जारी रहेगा। यदि शीघ्र इस पर विचार न किया गया तो कर्मचारी सड़कों पर उतरने से गुरेज नहीं करेंगे।
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