पालमपुर (कांगड़ा)। प्रदेश में लोगों के स्वास्थ्य को सही रखने के लिए लोगों को रासायनिक खाद्य से दूर रखने के लिए प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती को और बढ़ावा दिया है। इससे अब आने वाले दिनों में प्रदेश में प्राकतिक खेती हर विशेष बल देकर इस किसानों के खेतों तक पहुंचाया जाएगा।
शुक्रवार को प्रदेश सरकार के बजट में मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती को लेकर कई घोषणाएं की हैं। जिससे आने वाले दिनों में इस खेती को खेतों तक ले जाने में काफी मदद होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले ही प्राकृतिक खेती के लिए देश में 15 करोड़ रुपये के पास किए बजट में इस प्राकृतिक खेती को लेकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर काफी कुछ करना चाहते हैं, जबकि कृषि विवि पालमपुर पहले ही प्राकृतिक खेती पर शोध कर इसे किसानों के खेतों में पहुंचा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अपने बजट में कहा है कि पचास हजार एकड़ भूमि को प्राकृतिक खेती के अधीन लगाया जाएगा। प्रदेश की सभी तीन हजार 615 पंचायतों में प्राकृतिक कृषि का एक एक मॉडल विकसित कर आसपास के किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा। जबकि प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों को पंजीकृत कर उनमें श्रेष्ठ पचास हजार किसानों को प्राकृतिक कृषक के रूप में प्रमाणित किया जाएगा। यही नहीं, प्राकृतिक कृषि उत्पादों को
प्रदेश की दस मंडियों बिक्री के लिए विशेष स्थान उपलब्ध करवाए जाएंगे और इन उत्पादों के लिए दो विशेष मंडियां स्थापित की जाएंगी। वहीं कृषि एवं बागवानी विश्वविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठयक्रम में संशोधन कर शोध को प्रोत्साहित किया जाएगा। कृषि विवि के कुलपति प्रो. एचके चौधरी ने कहा कि प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को लेकर पहले ही काफी काम कर रही है, लेकिन प्रदेश सरकार के इस बजट में इस खेती को काफी बढ़ावा देने की घोषणाएं हुई हैं, जिससे विवि इसको जल्द धरातल पर उतारेगा। इससे प्रदेश के किसानों की काफी आर्थिकी मजबूत होगी।