ज्वालामुखी अस्पताल में डॉक्टरों की कमी, मरीज परेशान
अस्पताल में 14 पद स्वीकृत, नौ चिकित्सक दे रहे सेवाएं
गैर चिकित्सकों के पद भी अस्पताल में पड़े हैं खाली
कपिल शर्मा
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। ज्वालामुखी के 100 बेड वाले अस्पताल में मरीजों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में चिकित्सकों के पद खाली होने से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने अस्पताल में समय-समय पर बढ़ोतरी कर अस्पताल में बिस्तरों की संख्या तो 100 पहुंचा दी है, लेकिन चिकित्सकों के पद स्वीकृत करने के बाद उन्हें भरना जरूरी नहीं समझा। वर्तमान में अस्पताल में चिकित्सकों के 14 पद स्वीकृत हैं। इनमें से केवल नौ भरे हैं। गैर चिकित्सकों के पदों को भरने में भी सरकार दिलचस्पी नहीं दिखा रही है।
सिविल अस्पताल ज्वालामुखी पर क्षेत्र के 700 गांवों की डेढ़ लाख जनसंख्या निर्भर है। अस्पताल में स्टाफ की कमी के कारण इन लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। ज्वालामुखी अस्पताल में वर्तमान 14 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, जबकि इसमें से केवल नौ पद ही भरे गए हैं। इसमें कुछ नाइट ड्यूटी, तो कुछ की आपात सेवा तथा चिकित्सा कैंपों में भी ड्यूटी लग रही है। इससे अस्पताल की ओपीडी में चिकित्सकों की कमी रहती है। इससे ओपीडी के बाहर लंबी-लंबी लाइनें लगी रहती हैं। इसके अलावा गैर चिकित्सकों के पद भी खाली हैं। इससे यहां मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है।
क्या कहते हैं बीएमओ
खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिलाबर सिंह का कहना है कि संरचनात्मक ढांचे की अभी अस्पताल में कमी है। जैसे ही यह कमी दूर होगी रिक्त पद भर दिए जाएंगे।
अस्पताल में एक भी लैब असिस्टेंट नहीं
नर्स के 16 में से सात, फार्मासिस्ट के चार में से दो, क्लास फोर 14 में से 12, लैब असिस्टेंट तीन पद स्वीकृत हैं, जबकि ये सभी पद खाली हैं। इसके अलावा लैब टैक्नीशियन तीन में से एक पद भरा है। वहीं एक चौकीदार और ओटीए के दो पद खाली हैं।
आपातकाल में श्रद्धालु भी आते हैं यहां
ज्वालामुखी मंदिर में बनाई गई डिस्पेंसरी साल 2015 से बंद पड़ी है। इसलिए मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को आपातकाल के समय ज्वालाजी अस्पताल का ही सहारा है। इससे मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को भी आपात समय में खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।