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Shimla: जगत बोले- पूर्व राज्यपाल अपनी कार्यशैली पर नजर रखें, नौतोड़ से जुड़े प्रस्ताव पर फैसला न लेकर किया अन

Wed, 11 Mar 2026 09:20 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश में वर्क कल्चर के बजाय पूर्व राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को अपनी कार्यशैली पर नजर रखनी चाहिए। 
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राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश में वर्क कल्चर के बजाय पूर्व राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को अपनी कार्यशैली पर नजर रखनी चाहिए। राज्य सचिवालय में बुधवार को पत्रकार वार्ता में नेगी ने कहा कि उन्होंने कहा कि पूर्व राज्यपाल को 1980 के वन संरक्षण अधिनियम को निलंबित करने का प्रस्ताव भेजा गया था। उनसे पूर्व के राज्यपालों को भी इस तरह के प्रस्ताव भेजे गए थे, जो मंजूर हुए थे। इस नौतोड़ के एफसीए मामले में बार-बार अनुरोध करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। राज्यपाल से नौवीं बार मिलने की कोशिश की गई। वहां से बताया गया कि राज्यपाल नौ तारीख को मिलेंगे।

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वह इंतजार करते रह गए और राज्यपाल टिप्पणी करके चले गए। सांविधानिक पद पर बैठे राज्यपाल ने बहुत ही गैर जिम्मेदाराना बयान दिया। उन्होंने कहा कि नौतोड़ मामले में राज्य सरकार से उन्हें पूरी जानकारी नहीं मिली। ऐसा कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो वह अधिकारियों को सस्पेंड भी कर सकते थे, मगर उन्होंने जाते-जाते लोगों को गुमराह किया। वह आठवीं बार जब मिले तो राज्यपाल ने कभी नहीं कहा कि विभाग के लोगों से जानकारी नहीं मिली। शुरू के दिनों में अध्ययन करने की बात की। वह ऐसी पार्टी की विचारधारा से आते हैं जो जनजाति के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि यह बहुत ही गैर जिम्मेदाराना वक्तव्य है कि हिमाचल प्रदेश में वर्क कल्चर नहीं है। विधानसभा में भी अभिभाषण बीच में पढ़कर नहीं गए। नेगी ने कहा कि भाजपा की संकीर्ण सोच के कारण उन्होंने हिमाचल के लोगों का बहुत बड़ा नुकसान किया।

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राजस्व मंत्री ने किसानों की समस्याओं और मांगों पर किया मंथन
राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में बुधवार को शिमला में किसानों के विकास के लिए प्रदेश स्तर पर कार्यरत सामाजिक संस्था लघु किसान कल्याण एकता हिमाचल प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक आयोजित की गई। इसमें किसानों की विभिन्न समस्याओं और मांगों पर विचार-विमर्श किया गया। इसमें अवगत करवाया गया कि चकौतादार के आंकड़ों का डाटा प्रशासन के पास मौजूद आंकड़ों से मिलान नहीं हो पा रहा है। राजस्व मंत्री ने चकौतादार का डाटा शीघ्र उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह उपलब्ध होने पर सरकार की ओर से किसानों के हक में उचित निर्णय लिया जाएगा। इस बैठक में अतिरिक्त सचिव राजस्व बलवान चंद, प्रदेश प्रभारी कांति प्रकाश और लघु किसान कल्याण एकता हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष दलीप सिंह उपस्थित रहे। 
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