हालांकि, यह पदोन्नति सीडब्ल्यूपी संख्या 6345/2026 के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। विशाल शर्मा ने को 25 अप्रैल 2015 को उन्हें असिस्टेंट कंट्रोलर (वित्त एवं लेखा) और 26 सितंबर 2022 को डिप्टी कंट्रोलर (वित्त एवं लेखा) बनाया गया। आरएंडपी नियमों के अनुसार डिप्टी कंट्रोलर (वित्त एवं लेखा) से मंडलीय प्रबंधक (वाणिज्य) के पद पर पदोन्नति का प्रावधान है। याचिकाकर्ता का कहना था कि डिविजनल मैनेजर (कॉमर्स) का पद अक्तूबर 2024 में खाली हो गया था और उस समय तक वह आवश्यक दो वर्ष की सेवा पूरी कर चुके थे। 30 नवंबर 2024 की अंतिम वरिष्ठता सूची में भी उनका नाम डिप्टी कंट्रोलर (वित्त एवं लेखा) के रूप में पहले स्थान पर था। याचिकाकर्ता के अनुसार पद खाली होने के बावजूद पदोन्नति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई। इसके बाद 24 जून 2025 को डीपीसी की बैठक हुई, लेकिन उसकी सिफारिशों का परिणाम घोषित नहीं किया गया। इसको लेकर विशाल शर्मा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
दिव्यांग टीजीटी शिक्षकों के पदों का परिणाम घोषित न करने पर सरकार से जवाब तलब
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दिव्यांग श्रेणी के तहत टीजीटी शिक्षकों के पदों का परिणाम घोषित न करने पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार को अगली सुनवाई तक इस संबंध में स्पष्ट निर्देश रिकॉर्ड पर लाने का आदेश दिया है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने ब्लाइंड पर्सन एसोसिएशन व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि राज्य सरकार ने दिव्यांग श्रेणी के लिए 94 टीजीटी पदों को भरने के लिए 2 जनवरी 2026 को विज्ञापन जारी किया था।
इन पदों के लिए दस्तावेजों का सत्यापन और काउंसलिंग की प्रक्रिया 11 अगस्त 2026 को सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई थी। हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग की सिफारिशों के बाद 19 सितंबर 2026 को सामान्य और अन्य श्रेणियों का परिणाम घोषित कर दिया गया, लेकिन दिव्यांग उम्मीदवारों का अंतिम परिणाम मनमाने और अवैध तरीके से रोककर रखा गया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के वकील को इस मामले में तुरंत निर्देश प्राप्त करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 13 अक्तूबर 2026 को तय की गई है।