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Himachal: नगर निकाय अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव में विधायकों को वोट डालने से रोकने पर सुप्रीम कोर्ट गई सरकार

Thu, 11 Jun 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

 नगर निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में विधायकों के वोट देने के अधिकार की बहाली के लिए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर कर दी है।
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सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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 हिमाचल प्रदेश सरकार ने नगर निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में विधायकों के वोट देने के अधिकार की बहाली के लिए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायाधीश अतुल एस. चांदुरकर की पीठ के समक्ष यह मामला 15 जून के लिए सूचीबद्ध किया गया है। राज्य सरकार ने हिमाचल हाईकोर्ट की ओर से 4 जून को पारित अंतरिम आदेश को चुनौती दी है। दूसरी ओर, पार्षदों की ओर से भी शीर्ष अदालत में केविएट पिटीशन दाखिल की गई है।

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हिमाचल हाईकोर्ट ने 4 जून को राज्य सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसके तहत स्थानीय विधायक को नगर निकायों यानी नगर निगम, नगर परिषद या नगर पंचायत चुनाव में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में बराबर पार्षद होने पर वोट डालने का अधिकार दिया था। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि पदेन सदस्य यानी विधानसभा सदस्य स्थानीय निकायों के शीर्ष पदों के चुनाव में मतदान नहीं कर सकते हैं। अध्यक्ष का चुनाव सिर्फ चुने हुए पार्षद करेंगे। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि विधायकों के अधिकार पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। अधिनियम की धारा 28, 30, 31 और 32 के तहत होने वाली सामान्य बैठकों या समितियों की बैठकों में विधायक भाग ले सकते हैं और अन्य सामान्य मुद्दों पर अपना वोट डाल सकते हैं। हालांकि, सरकार ने तर्क दिया है कि विधायकों को वोट देने का पूर्ण अधिकार है लेकिन, कोर्ट ने इन तर्कों को खारिज कर दिया था।
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