यह पार्क न केवल रोजगार और स्वरोजगार सृजन का प्रमुख केंद्र बनेगा, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का नया माध्यम भी बनेगा। यह एकीकृत एक्वा पार्क अत्याधुनिक फ्रेश वाटर एक्वा कल्चर तकनीकों को गांव-गांव तक पहुंचाने का केंद्र बनेगा। परियोजना के अंतर्गत मछली बीज उत्पादन, आहार निर्माण, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और विपणन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे किसानों और युवाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह पार्क उच्च गुणवत्ता वाले मत्स्य आहार की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा, जिससे स्थानीय किसान मछली उत्पादन बढ़ाने में सक्षम होंगे। पार्क में मछली आहार निर्माण इकाई, प्रदर्शन इकाइयां और व्यावहारिक प्रशिक्षण केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे, जहां बेरोजगार युवाओं को उन्नत मत्स्य पद्धतियों का प्रशिक्षण मिलेगा।
इन प्रजातियों पर होगा ध्यान केंद्रित
एकीकृत एक्वा पार्क में विभिन्न मछली प्रजातियों के उच्च गुणवत्ता वाले बीज उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। भारतीय मेजर कार्प, जयंती रोहू, अमृत कतला, मृगल, विदेशी कार्प हंगेरियन और अमूर स्ट्रेन माइनर कार्प कुलवांस, कैटफिश पंगेसियस, मुर्रेल, सजावटी मछलियां गोल्ड फिश, कोई कार्प, गप्पी, मौली के बीज के उत्पाद पर ध्यान केंद्रित होगा।