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हिमाचल: मेरिट दरकिनार कर नियुक्ति देने के आदेश पर रोक, जानें प्रदेश हाईकोर्ट के बड़े फैसले

Wed, 26 Aug 2026 05:30 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने एकल पीठ के उस फैसले के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें एक अभ्यर्थी को मेरिट सूची में ऊपर मौजूद उम्मीदवार से पहले विचार करने का निर्देश दिया गया था। जानें प्रदेश हाईकोर्ट के बड़े फैसले...
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एकल पीठ के उस फैसले के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें एक अभ्यर्थी को मेरिट सूची में ऊपर मौजूद उम्मीदवार से पहले विचार करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने मामले में पक्षकारों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई 9 अक्तूबर तय की है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधवालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने यह आदेश राज्य चयन आयोग की ओर से दायर अपील को स्वीकार करते हुए 24 अप्रैल 2026 के फैसले के क्रियान्वयन पर अपील के लंबित रहने तक रोक लगा दी है। 

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आयोग ने दलील दी कि याचिकाकर्ता (कृष्ण चंद) ने एससी (बीपीएल) श्रेणी में 41. अंक प्राप्त किए थे। जबकि संयुक्त मेरिट सूची में एक अन्य एससी (बीपीएल) उम्मीदवार के 45 अंक थे। ऐसे में कम अंक वाले अभ्यर्थी को सीधे राहत देना मेरिट के स्थापित सिद्धांत के विरुद्ध है। खंडपीठ के समक्ष तर्क दिया गया कि बीपीएल श्रेणी के अन्य अभ्यर्थियों के अयोग्य घोषित होने के बाद, सही कानूनी प्रक्रिया मेरिट सूची को आगे संचालित करने की थी, न कि उच्च अंक वाले उम्मीदवार को दरकिनार कर कम अंक वाले याचिकाकर्ता को विचार क्षेत्र में लाने की।

जलविद्युत परियोजना से फसल नुकसान पर 8 सप्ताह में फैसला लेने के निर्देश
 प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (जलविद्युत परियोजना) के निर्माण के कारण हुए फसल और वानिकी नुकसान के मुआवजे से जुड़ी याचिकाओं पर महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की एकल पीठ ने मामले का निपटारा करते हुए संबंधित सक्षम अधिकारी को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ताओं की ओर से दिए गए अभ्यावेदन पर 8 सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार उचित निर्णय लें। इंदर सैन और अन्य 10 याचिकाकर्ताओं ने अदालत में अलग-अलग रिट याचिकाएं दायर कर प्रतिवादी निर्माता हाइड्रो प्रोजेक्ट से फसल/बागवानी नुकसान के एवज में 13.06 लाख और पारंपारिक वन अधिकारों के नुकसान के लिए प्रभावित गांवों के लिए 766 लाख के मुआवजे की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि वे वर्ष 2012 के कार्यालय आदेश और 27 जनवरी 2018 के आदेश के तहत पहले से मुआवजा पा चुके लोगों के समान ही लाभ पाने के हकदार हैं। 

त्रिलोकीनाथ मंदिर परिसर स्थित सराय का होगा जीर्णोद्धार
प्रदेश हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद मंडी जिला के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक त्रिलोकीनाथ मंदिर परिसर स्थित सराय का जीर्णोद्धार होगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने मंदिर और सराय की मरम्मत व संरक्षण कार्य के लिए 30 लाख रुपये का बजटीय प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि एएसआई शिमला सर्कल ने महानिदेशक से 30 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मांगी है। न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की अदालत ने इस धनराशि को स्वीकृत करने और आगामी कार्रवाई की विस्तृत जानकारी रिकॉर्ड पर लाने के लिए केंद्र सरकार को तीन सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।

एएसआई की ओर से की गई जांच में सराय की बदहाली की पुष्टि हुई
मंदिर के पुजारी रमेश कुमार ने आरोप लगाया है कि साल 2016 की एक पुरानी याचिका के दौरान सराय के रखरखाव का भरोसा देने के बावजूद एएसआई ने इस ऐतिहासिक धरोहर की पूरी तरह अनदेखी की, जिससे सराय की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही थी। इस पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने बीती 8 जुलाई 2026 को एएसआई को तुरंत मंदिर परिसर का निरीक्षण कर एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। अदालत के आदेश पर एएसआई की ओर से की गई जांच में सराय की बदहाली की पुष्टि हुई। सराय के अंदरूनी कमरों और बरामदे की छतों को तुरंत मरम्मत और जीर्णोद्धार की जरूरत पाई गई और कहा गया कि सराय के दरवाजे और खिड़कियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिन्हें बदलना या ठीक करना होगा। परिसर के बाहर रखी प्राचीन मूर्तियों, वास्तुकला के अंगों और कलाकृतियों को सहेजने के लिए एक इंटरप्रिटेशन सेंटर (व्याख्या केंद्र) विकसित करने की योजना बनाई गई है। अदालत ने यह आदेश मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर दायर याचिका पर दिए हैं।
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12 साल की उम्र में कैसी की 10वीं पास, हाईकोर्ट ने स्टाफ नर्स से मांगा जवाब
 प्रदेश हाईकोर्ट ने स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत एक महिला कर्मचारी के शैक्षणिक दस्तावेजों और जन्मतिथि में पाई गई विसंगति पर हैरानी जताई है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने याचिकाकर्ता से हलफनामा दायर कर स्पष्ट करने को कहा है कि उन्होंने महज 12 वर्ष की आयु में मैट्रिक (10वीं) की परीक्षा कैसे उत्तीर्ण की। याचिकाकर्ता को स्टाफ नर्स का पद प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल की गईं अपनी सभी आगामी शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यताओं के मूल प्रमाणपत्र भी अदालत के रिकॉर्ड पर पेश करने होंगे। अदालत ने आदेश दिया है कि सुनवाई की अगली तारीख से पहले सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएं। मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी। अदालत ने यह आदेश याचिकाकर्ता स्टाफ नर्स की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट के समक्ष रिकॉर्ड से पता चला कि याचिकाकर्ता विजय लक्ष्मी भार्गव के मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट के अनुसार उन्होंने मार्च 1981 में 10वीं की परीक्षा पास की थी। दूसरी ओर, याचिकाकर्ता के ही आग्रह पर उनके सर्विस रिकॉर्ड (सेवा पुस्तिका) में जन्मतिथि संशोधित कर 1 जून 1968 दर्ज की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आदेश में कहा कि यदि यह मान लिया जाए कि याचिकाकर्ता की जन्मतिथि वास्तव में 1 जून 1968 है, तो यह समझ से परे है कि उन्होंने मात्र 12 वर्ष की आयु में मैट्रिक की परीक्षा कैसे पास कर ली। दोनों आधिकारिक दस्तावेजों में दिखाई दे रहा यह अंतर तार्किक रूप से मेल नहीं खाता है।
 
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