गांव के निवासी जगदीश ने कहा हमारी मांग यही है कि नाले में बाढ़ की रोकथाम के लिए काम किया जाए। भू-स्खलन के बाद जो मलबा जमा हो रहा है, वह हर बार बाढ़ में बह जाता है। नाला और गहरा होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि यह रोकथाम संभव नहीं है तो कम से कम विस्थापन प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। प्रभावित ग्रामीण राहुल, हीरा लाल और छेरिंग दोरजे कहते हैं कि प्रशासन की ओर से अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं, न तो बाढ़ रोकथाम के कार्य शुरू हुआ हैं और न ही विस्थापन को लेकर कोई ठोस कदम उठाया गया है।
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उपायुक्त लाहौल-स्पीति किरण भड़ाना ने कहा कि जिला प्रशासन स्थिति पर निगरानी बनाए हुए है। उन्होंने गांव को विस्थापन व पुनर्वास को लेकर रिपोर्ट सरकार को भेज दी है। सरकार के आदेश के बाद अगली प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।