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Himachal: राज्य सहकारी बैंक के कर्मचारी चार वर्ष की सेवा पर ग्रेड पे के हकदार, हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला

Thu, 25 Jun 2026 11:07 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

हाईकोर्ट के न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने बैंक प्रबंधन को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं को चार वर्ष की सेवा पूरी होने की तिथि से एसीपीएस का लाभ प्रदान करे। 
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सहकारी बैंक के कर्मचारियों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी को नियुक्ति के बाद चार साल तक पदोन्नति नहीं मिलती है, तो वह नई एश्योर्ड कॅरियर प्रोग्रेशन स्कीम (एसीपीएस) के तहत अगले ग्रेड पे का लाभ पाने का हकदार होगा। हाईकोर्ट के न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने बैंक प्रबंधन को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं को चार वर्ष की सेवा पूरी होने की तिथि से एसीपीएस का लाभ प्रदान करे। हालांकि, याचिका दायर करने में हुई देरी को देखते हुए अदालत ने वित्तीय एरियर के भुगतान को सीमित करते हुए कहा कि कर्मचारियों को याचिका दायर करने की तिथि से तीन वर्ष पूर्व तक की अवधि का ही बकाया मिलेगा।

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अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बैंक तीन माह के भीतर एरियर का भुगतान नहीं करता है, तो उसे बकाया राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह आदेश अजय कुमार एवं अन्य कर्मचारियों की ओर से दायर दो अलग-अलग याचिकाओं के निपटारे के दौरान पारित किया गया। हाईकोर्ट ने बैंक की सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि वेतन या एसीपीएस लाभ से वंचित रखना एक निरंतर होने वाली गलती है, जिससे कर्मचारियों को हर माह नुकसान होता है। इसलिए इसे केवल समय-सीमा के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।

यह है मामला

याचिकाकर्ताओं को सितंबर और अक्टूबर 2017 में जूनियर क्लर्क के पद पर नियुक्त किया गया था। वर्ष 2021 में उन्होंने बिना किसी पदोन्नति के अपनी चार वर्ष की सेवा पूरी कर ली थी, जबकि वर्ष 2023 में उन्हें एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट के पद पर पदोन्नत किया गया। कर्मचारियों का आरोप था कि वर्ष 2016 में नियुक्त अन्य कर्मियों को चार वर्ष पूरे होने पर एसीपीएस का लाभ दिया गया, लेकिन उनके मामले में यह लाभ रोका गया, जो भेदभावपूर्ण और मनमाना था।
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बैंक प्रबंधन की दलील

बैंक प्रबंधन ने दलील दी कि नियुक्ति के समय कर्मचारियों को संशोधित उच्च वेतनमान (10300-34800 + 3200 ग्रेड पे) दिया जा चुका था, इसलिए वे अलग से वित्तीय उन्नयन के पात्र नहीं हैं। साथ ही, बैंक ने याचिका दायर करने में हुई देरी का हवाला देकर मामले को खारिज करने की मांग की।
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