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Himachal News: हिमकेयर योजना का ऑडिट शुरू, गड़बड़झाले की होगी जांच; राज्य लेखा परीक्षा विभाग ने शुरू किया काम

Sat, 22 Mar 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

मुख्यमंत्री ने बीते दिनों विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान कहा था कि हिमाचल में हिमकेयर योजना में हुए गड़बड़झाले की जांच की जाएगी। वहीं, अब हिमकेयर योजना का ऑडिट शुरू हो गया है। 
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल में हिमकेयर योजना का ऑडिट शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देश पर राज्य लेखा परीक्षा विभाग ने मरीजों की संख्या, उनकी बीमारी और उस पर किए खर्च का रिकॉर्ड जुटाना शुरू कर दिया है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला, टांडा मेडिकल कॉलेज कांगड़ा, पीजीआई चंडीगढ़ सहित सभी निजी अस्पतालों की ऑडिट के तहत जांच की जाएगी। प्रधान सचिव वित्त की ओर से राज्य लेखा परीक्षा विभाग को ऑडिट करने के निर्देश दिए गए हैं।

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मुख्यमंत्री ने बीते दिनों विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान कहा था कि हिमाचल में हिमकेयर योजना में हुए गड़बड़झाले की जांच की जाएगी। पूर्व सरकार ने योजना के तहत 800 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, सरकार इसका ऑडिट करवाएगी। सदन में भी रिपोर्ट रखी जाएगी। इसी कड़ी में अब वित्त विभाग ने ऑडिट के निर्देश जारी किए हैं। राज्य लेखा परीक्षा विभाग की ओर से इस बाबत आईजीएमसी, टांडा और पीजीआई चंडीगढ़ सहित निजी अस्पतालों को पत्र जारी कर सारा रिकॉर्ड देने को कहा है। पूर्व सरकार सहित वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दौरान हिमकेयर योजना के तहत हुए सभी इलाज का ऑडिट किया जाएगा। कितनों लोगों का हिमकेयर में इलाज हुआ, इसकी जानकारियां जुटाई जा रही हैं। यह भी पता किया जा रहा है कि अस्पताल में जो इलाज हुआ, उससे संबंधित उपकरण भी वहां हैं या नहीं।

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350 करोड़ रुपये निजी अस्पतालों को लुटा दिए गए
उधर, मुख्यमंत्री ने कहा है कि हिमकेयर के नाम पर 350 करोड़ रुपये निजी अस्पतालों को लुटा दिए गए। इनमें से 190 करोड़ का भुगतान मौजूदा सरकार कर चुकी है। पूर्व सरकार के दौरान हिमकेयर योजना के तहत 9.50 लाख लोग इलाज करवाने के लिए बाहर चले गए। इससे प्रदेश की जीडीपी को एक हजार करोड़ का नुकसान हुआ। उनकी सरकार ने बीते 2 साल में हिमकेयर पर 306 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। एक एमबीबीएस डॉक्टर ने अपना अस्पताल खोल दिया और हिमकेयर में पंजीकृत हो गया। एक वर्ष में 6-6 करोड़ रुपये लेकर एक मंजिला भवन 5 मंजिला में बदल गया।
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