हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ऊना जिले के मंडल वन अधिकारी की ओर से जारी उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें निजी भूमि पर खड़े सूखे और गिरे हुए खैर के पेड़ों को काटने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया था। न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की अदालत ने कुलवंत सिंह और अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब जमीन का मालिकाना हक और कब्जा स्पष्ट है, तो वन विभाग तकनीकी आधार पर अनुमति नहीं रोक सकता है। अदालत ने वन विभाग को निर्देश दिया कि वे दो सप्ताह के भीतर भूमि का फिर से सीमांकन करें और सूखे और गिरे हुए पेड़ों की पहचान करें। चिह्नित पेड़ों को काटने की अनुमति अगले दो सप्ताह के भीतर प्रदान करें।