न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने राज्य सरकार की ओर से जारी 17 और 28 फरवरी 2022 के कार्य मुक्ति आदेश पर रोक लगा दी है। इन आदेशों के तहत याचिकाकर्ता को पहले 62 साल और बाद में 65 साल की उम्र में सेवानिवृत्त किया गया था। याचिकाकर्ता ने प्रोफेसर के रूप में ड्यूटी जारी रखी। 6 मार्च 2025 के आदेशों के तहत याचिकाकर्ता को 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त कर दिया गया। अदालत ने सरकार के आचरण पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रतिवादियों का व्यवहार याचिकाकर्ता के लिए संतोषजनक नहीं रहा है। कोर्ट ने कहा कि जब याचिकाकर्ता की 68 साल की उम्र तक सेवा विस्तार की मांग विचाराधीन थी, तब भी सरकार ने 6 मार्च 2025 को याचिकाकर्ता को 65 साल की उम्र में सेवानिवृत्त करने का आदेश जारी कर दिया। अदालत ने इस बात पर जोर दिया है कि राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेतों में शिक्षक संकाय की भारी कमी है।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने इस कमी के कारण प्रति मेडिकल कॉलेज 12 लाख का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने कहा कि इस कमी के बावजूद सरकार ने याचिकाकर्ता को जिसका सेवा रिकॉर्ड बेदाग था, सेवा विस्तार देने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि सरकार ने अन्य सामान मामलों में प्रोफेसर को 68 साल तक सेवा विस्तार दिया है, लेकिन याचिकाकर्ता को यह लाभ नहीं दिया गया। सरकार ने पहले डॉक्टर राणा को 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त करने का आदेश जारी किया और बाद में उनकी याचिका के लंबित रहते हुए 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त कर दिया।